आरबीआई, फोटो - सोशल मीडिया
RBI New Rule From 1st October: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने प्रोजेक्ट लोन से जुड़े नए नियम जारी कर दिए हैं, जो 1 अक्टूबर 2025 से देशभर के सभी बैंकों और वित्तीय संस्थाओं पर लागू होंगे। इन नए नियमों को RBI (Project Finance) Directions, 2025 नाम दिया गया है। इनका उद्देश्य प्रोजेक्ट लोन के दौरान होने वाली परेशानियों को दूर करना और जोखिम को संतुलित तरीके से मैनेज करना है।
आरबीआई ने पहले 3 मई 2024 को इन गाइडलाइंस का ड्राफ्ट पेश किया था और सभी संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे थे। इस पर लगभग 70 संस्थानों, जैसे बैंक, एनबीएफसी, इंडस्ट्री संगठन, शिक्षाविद, लॉ फर्म, आम नागरिक और सरकार के विभागों ने अपने सुझाव दिए। इन सभी फीडबैक को ध्यान में रखते हुए फाइनल गाइडलाइंस तैयार की गई हैं।
क्या है इन नए नियमों की खास बातें?
- स्ट्रेस मैनेजमेंट के लिए नया सिस्टम:
अब सभी बैंकों और वित्तीय संस्थाओं के लिए एक समान नियम होंगे, जिससे प्रोजेक्ट फाइनेंस में होने वाली समस्याओं का समाधान एक तय प्रक्रिया के तहत किया जा सकेगा। - DCCO में मिलेगी राहत:
DCCO यानी Date of Commencement of Commercial Operations की समय सीमा अब इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए 3 साल और नॉन-इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए 2 साल तक बढ़ाई जा सकती है। इससे कंपनियों को अपने प्रोजेक्ट्स को पूरा करने में अधिक समय और लचीलापन मिलेगा। - प्रोविजनिंग में बदलाव:
प्रोजेक्ट के निर्माण के समय बैंकों को अब 1% की दर से प्रोविज़न रखना होगा, जो समय के साथ बढ़ेगा अगर प्रोजेक्ट में देरी होती है। वहीं, कमर्शियल रियल एस्टेट (CRE) प्रोजेक्ट्स के लिए यह दर थोड़ी अधिक, यानी 1.25% होगी। - ऑपरेशनल फेज में प्रोविज़निंग में छूट:
जब प्रोजेक्ट चालू हो जाएगा यानी ऑपरेशनल फेज में पहुंच जाएगा, तब प्रोविज़न की दर घटा दी जाएगी।
- CRE के लिए: 1%
- CRE-RH (रेजिडेंशियल हाउसिंग) के लिए: 0.75%
- अन्य प्रोजेक्ट्स के लिए: 0.40%
क्यों जरूरी थे ये बदलाव?
बैंक और डेवलपर लंबे समय से यह मांग कर रहे थे कि प्रोजेक्ट लोन के नियमों में लचीलापन हो, ताकि समय पर फंडिंग मिले और प्रोजेक्ट की देरी से नुकसान न हो। आरबीआई की यह नई गाइडलाइंस लोन देने में पारदर्शिता लाएगी, जोखिम का प्रबंधन बेहतर करेगी और साथ ही बैंकों को नुकसान से भी बचाएगी।
इन बदलावों से उम्मीद की जा रही है कि भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में निवेश और विकास को बढ़ावा मिलेगा।