जब अमेरिकन राष्ट्रपति ने ईरान और इजरायल के बीच युद्धविराम का ऐलान किया तो पूरे पश्चिम एशिया ने राहत की सांस ली, लेकिन ये महज थोड़ी देर की राहत थी क्योंकि पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीदें उस वक्त कमजोर पड़ गईं जब इजरायल ने दावा किया कि सीजफायर के ऐलान के कुछ ही देर बाद ईरान की ओर से मिसाइलें दागी गईं। इजरायल के मुताबिक, यह हमला हाइफा क्षेत्र में हुआ जिसे उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने नाकाम कर दिया।
इजरायल का जवाबी हमला, ईरान का इनकार
इजरायली डिफेंस मिनिस्टर इसरायल काट्ज ने कहा कि उन्होंने “सीजफायर के उल्लंघन” पर ईरान की राजधानी तेहरान के केंद्र में स्थित ठिकानों पर जोरदार जवाबी कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
जवाब में, ईरान ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि उसने कोई मिसाइल लॉन्च नहीं की है और इजरायल के दावे “बेबुनियाद और भड़काऊ” किस्म के हैं।
नेतन्याहू बोले – “हमने लक्ष्य पूरा कर लिया”
इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने अपना बयान जारी कर कहा कि उनका देश अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के युद्धविराम प्रस्ताव को स्वीकार करता है, क्योंकि “ईरान के परमाणु और मिसाइल खतरे को खत्म करने” का लक्ष्य पूरा हो चुका है।
ईरान की चेतावनी – “हम ट्रिगर पर उंगली रखे हैं”
ईरान की टॉप सुरक्षा संस्था ने बयान जारी करते हुए कहा कि उनकी सेनाएं किसी भी आक्रामक कार्रवाई का निर्णायक और पछताने योग्य जवाब देने को एकदम तैयार हैं।
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी ये साफ किया कि अभी तक कोई औपचारिक युद्धविराम समझौता नहीं हुआ है, लेकिन यदि इजरायल कार्रवाई रोकता है, तो ईरान भी पलटवार रोकने पर विचार करेगा।
अमेरिका की भूमिका अस्पष्ट
ईरानी सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका की ओर से अब तक कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं मिला है। वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अमेरिका और इजरायल के बयानों को “झूठ और छलावा” माना जाएगा और ईरान जवाबी कार्रवाई तेज करने की तैयारी में है।
ट्रंप के ऐलान के बाद इजरायल ने युद्धविराम की बात की है, लेकिन मौजूदा हालत से साफ है कि क्षेत्र में तनाव अभी पूरी तरह थमा नहीं है। मिसाइल हमले के दावे, उनका खंडन, और एक-दूसरे को दी जा रही चेतावनियाँ दर्शाती हैं कि शांति अभी भी नाज़ुक कगार पर खड़ी है।