ईरान और इजरायल के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है.
इजरायल और ईरान के बीच शुरू संघर्ष ने वैश्विक तेल बाजारों को पूरी तरह हिलाकर रख दिया है. अब इसका गहरा असर पड़ोसी देश पाकिस्तान पर भी देखने को मिल रहा है. बलूचिस्तान प्रांत में गंभीर ईंधन संकट खड़ा हो गया है, जहां ईरान से होने वाली तेल की तस्करी रुकने और सड़क नाकाबंदी के कारण पेट्रोल पंप बंद हो गए हैं. इसके साथ ही, पाकिस्तान सरकार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी करनी पड़ गई, जिससे लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई है.
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में उछाल
पाकिस्तानी अखबार डॉन अखबार की एक रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल-ईरान संघर्ष के बीच वैश्विक तेल बाजारों में उथल-पुथल की वजह से पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की है. पेट्रोल की कीमत 253.63 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 258.43 रुपये प्रति लीटर हो गई, यानी 4.80 रुपये की वृद्धि. वहीं, हाई-स्पीड डीजल (HSD) की कीमत 254.64 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 262.59 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है, जिसमें 7.95 रुपये की बढ़ोतरी हुई है. यह निर्णय ऑयल एंड गैस रेगुलेटरी अथॉरिटी (OGRA) और संबंधित मंत्रालयों की सिफारिशों पर हुआ.
बलूचिस्तान में ईंधन और खाद्य संकट
पाकिस्तान का बलूचिस्तान प्रांत ईरान के साथ सीमा साझा करता है, इसलिए ये इलाका इस संघर्ष से सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है. ईरान से तेल की तस्करी, जो इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा थी, पूरी तरह ठप हो गई है. मकरान, रक्शान और चगाई क्षेत्रों के जरिए होने वाली तेल की आपूर्ति निलंबित होने से बलूचिस्तान में 60 से 70 प्रतिशत पेट्रोल पंप बंद हो गए. तुरबत, ग्वादर, पंजगुर, चगाई, वाशुक और मश्काइल जैसे सीमावर्ती जिले इस संकट की मार झेल रहे हैं. यहां न केवल ईंधन की कमी हो रही है, बल्कि खाद्य आपूर्ति भी बाधित है, क्योंकि बलूचिस्तान के इन हिस्सों में खाने-पीने की चीजें भी ईरान से आती थीं. पिछले सप्ताह जिला प्रशासन ने पेट्रोल पंपों को बंद कर दिया था, जिससे क्वेटा और अन्य जिलों में नागरिकों की परेशानियां बढ़ गई हैं. नतीजतन तेल की कालाबाजारी भी शुरू हो गई है, जहां तस्करी का पेट्रोल 280 से 300 रुपये प्रति लीटर में बिक रहा है, जबकि सरकारी कीमत 254 रुपये प्रति लीटर है.
सड़क नाकाबंदी ने बढ़ाई मुश्किलें
कराची से बलूचिस्तान के लिए पेट्रोल की आपूर्ति क्वेटा और बंदरगाह शहर के बीच विभिन्न बिंदुओं पर सड़क नाकाबंदी के कारण प्रभावित हुई है. इस नाकाबंदी ने ईंधन की वैकल्पिक आपूर्ति को भी बाधित कर दिया है, जिससे क्वेटा में पेट्रोल पंपों पर लंबी-लंबी कतारें लग गई. सोशल मीडिया पर लोगों ने इस स्थिति को बयां करते हुए लिखा कि गाड़ी की टंकी भी खाली है, जेब भी खाली.
बलूचिस्तान सरकार का दावा
बलूचिस्तान सरकार ने दावा किया है कि प्रांत में ईंधन की कोई कमी नहीं है. ईंधन की कमी की खबरों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है.इजरायल-ईरान संघर्ष ने वैश्विक तेल आपूर्ति पर चिंता बढ़ा दी है, खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर. अगर दोनों देशों के बीच ये संघर्ष और लंबा चलता है तो तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं, जिसका असर पाकिस्तान जैसे आयात पर निर्भर देशों पर गहरा होगा. इस बीच, बलूचिस्तान में लाखों लोग, जो तस्करी के तेल पर निर्भर हैं, अनिश्चितता और आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं.