मुहर्रम जुलूस में हादसा
Muharram Muharram: झारखंड के गिरिडीह जिले से आज एक बेहद दुखद खबर आई, जहां मुहर्रम के जुलूस के दौरान बिजली का करंट लगने से एक व्यक्ति की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, वहीं कम से कम चार अन्य लोग गंभीर रूप से झुलस गए। इस घटना ने पूरे इलाके में मातम का माहौल पैदा कर दिया है।
Muharram: कैसे हुआ हादसा
यह हादसा गिरिडीह जिले के चाकोसिंघा गांव में उस वक्त हुआ जब परंपरागत तरीके से मुहर्रम का जुलूस निकाला जा रहा था। लोग पूरे उत्साह के साथ ताजिया उठाए हुए थे। जुलूस जैसे ही थोड़थंभा ओपी क्षेत्र से गुजरा, तभी एक बड़ा ताजिया लोगों ने कंधों पर उठाया और आगे की ओर बढ़ने लगे। तभी ताजिया अचानक सड़क के ऊपर से गुजर रहे 11 हजार वोल्ट के हाईटेंशन तार के संपर्क में आ गया।
Muharram: बिजली से टकराया ताजिया
ताजिया तार छूते ही बिजली का तेज करंट उसमें दौड़ गया। ताजिया उठाए लोग करंट की चपेट में आकर बुरी तरह कांपने लगे और देखते ही देखते पांच-छह लोग जमीन पर गिर पड़े और अफरा-तफरी मच गई। इनमें से एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि चार लोग कराहते हुए जमीन पर पड़े रहे। इनमें दो की हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है।
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Muharram: हरकत में आया प्रशासन
हादसे की जानकारी मिलते ही गिरिडीह जिला प्रशासन हरकत में आ गया। उपायुक्त रामनिवास यादव के निर्देश पर प्रशासनिक और स्वास्थ्य टीम मौके पर पहुंची। जिसके बाद घायलों को तत्काल गिरिडीह सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है।
Muharram: पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे
मुहर्रम के जुलूस में हाईटेंशन तार की चपेट में आने की यह कोई पहला हादसा नहीं है। पिछले साल भी गिरिडीह के ही जमुआ थाना क्षेत्र के चकमंजो गांव में ऐसा ही हादसा हुआ था। तब ताजिया में करंट प्रवाहित होने से युवक की मौत हो गई थी और दो लोग घायल हुए थे। इससे भी पहले वर्ष 2023 में बोकारो जिले के पेटरवार में मुहर्रम के दौरान ताजिया 11 हजार वोल्ट के तार से टकरा गया था, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई थी तब भी दस से ज्यादा लोग झुलस गए थे।
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Muharram: हाईकोर्ट की गाइडलाइन के बावजूद लापरवाही
झारखंड हाईकोर्ट ने पिछले साल ही झारखंड राज्य विद्युत आपूर्ति निगम को निर्देश दिया था कि इस तरह के धार्मिक जुलूसों में झंडे, ताजिया, झांकियों आदि की ऊंचाई को लेकर कड़ी निगरानी रखी जाए। इसके बाद निगम ने हाल ही में गाइडलाइन भी जारी की थी कि धार्मिक जुलूसों में कितनी ऊंचाई तक की संरचना ले जाई जा सकती है, ताकि ऐसे हादसों को रोका जा सके। इसके बावजूद कई इलाकों में बिना किसी मापदंड के बड़े-बड़े ताजिये तैयार किए जा रहे हैं, जिससे इस तरह की दर्दनाक घटनाएं हो रही हैं।
Muharram: गांव में पसरा मातम
हादसे के बाद चाकोसिंघा गांव में मातम का माहौल है। मृतक के घर में कोहराम मचा है। पूरे इलाके में गम और सन्नाटा छा गया है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि मृतक के परिवार को सरकारी सहायता दी जाएगी और घायलों के इलाज का पूरा खर्च सरकार वहन करेगी।
Muharram: अब सवाल – क्या सबक लिया जाएगा?
प्रशासन ने इस हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि आखिर इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है। सवाल यही है कि जब हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देश हैं तो फिर इतनी ऊंचाई के ताजिए क्यों तैयार किए जा रहे हैं? जिससे कोई हादसा हो जाए। क्या इस बार भी हादसे के बाद केवल खानापूर्ति होगी या फिर सच में कोई ठोस कदम उठाया जाएगा?