Israel-Iran conflict: मध्य पूर्व में इज़राइल और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव ने वैश्विक कच्चे तेल (क्रूड) की कीमतों में तेजी ला दी है, जिससे भारत में पेट्रोल‑डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना बढ़ गई है। पिछले सप्ताह के अंत में दोनों पक्षों के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमलों की खबरों के बाद ब्रेंट क्रूड में लगभग 7–11 % की उछाल देखी गई; शरण्स में तेल सुविधाओं, ईरानी गैस संयंत्रों, और तेल डिपो पर हमले से सप्लाई शृंखला प्रभावित हुई है
आज (16 जून 2025) सुबह ब्रेंट क्रूड $74–78 प्रति बैरल की ऊँचाई पर पहुंच गया, जबकि यूएस WTI क्रूड भी इसी ओवरहॉट रेंज में ट्रेड हो रहा है । इसके पीछे मुख्य कारण है खाड़ी क्षेत्र की खतरनाक स्थिति और संभावित मार्ग, मैसाला ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़’, को लेकर चिंता। यदि यह मार्ग अवरुद्ध होता है, तो कच्चे तेल की वैश्विक सप्लाई और भी अधिक बाधित हो सकती है
भारत इस समय लगभग 85–90 % तेल की खपत आयात पर निर्भर करता है और अधिकतर तेल खाड़ी देश—सऊदी, इराक, कुवैत, यूएई—से आता है। थोक स्तर पर कीमतों में वृद्धि का असर पेट्रोल‑डीजल के भाव में सीधे परिलक्षित हो सकता है, लेकिन फिलहाल घरेलू बाजार में राहत बनी हुई है क्योंकि सरकार ड्यूटी, बेस प्राइस और एक्साइज दरों से स्थिति को नियंत्रित कर रही है.
हालाँकि, विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि संघर्ष और गहराता है या सप्लाई चेन को और बड़ा झटका लगता है, तो कच्चा तेल $100–130 प्रति बैरल तक पहुंच सकता है, जिससे भारत में फिलिंग स्टेशन पर कीमतों में भी बढ़ोतरी अपरिहार्य हो सकती है । इसके अलावा, भारतीय रुपये पर भी दबाव बढ़ने की आशंका है: पिछले हफ्ते तेल की कीमतों में उछाल से रुपये का मूल्य 86 प्रति डॉलर से गिरकर 86.20 तक पहुंच गया, जिससे आरबीआई को हस्तक्षेप करना पड़ा
सरकारी और तेल कंपनियों को चाहिए कि वे वैकल्पिक स्रोत — जैसे अफ्रीका या दक्षिण अमेरिका — पर ध्यान दें और रणनीतिक भंडार को मजबूत बनाएं, ताकि उपभोक्ताओं को अगले कुछ महीनों में लाभदायक दरों पर ईंधन मिल सके। यदि संघर्ष लंबे समय तक चलता है, तो तेल कंपनियों को संभवत: रेट में संशोधन करने होंगे, जिससे आम आदमी को सीधा आर्थिक असर हो सकता है।