पुलिस की गिरफ्त में चारों माओवादी (AI IMAGE)
Crime: झारखंड की राजधानी रांची में पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए चार माओवादियों को गिरफ्तार किया। इन पर सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) के एक कर्मचारी से एक करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने का आरोप लगा है। पुलिस ने बताया कि इनकी गिरफ्तारी जिले के खलारी और मैक्लुस्कीगंज थाना क्षेत्रों से की गई।
Crime: योगेंद्र गंझू कौन है
रांची के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) चंद्र कुमार सिन्हा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी देते हुए बताया कि गिरफ्तार किए गए माओवादियों की पहचान योगेंद्र गंझू उर्फ पवन गंझू, मुकेश गंझू, मनु गंझू और राजकुमार नाहक के रूप में की गई है। इनके पास से एक पिस्तौल और कारतूस भी बरामद किए गए, जिससे इनके माओवादी गतिविधियों में संलिप्तता की पुष्टि होती है।
- एसएसपी ने कहा कि मुख्य आरोपी योगेंद्र गंझू की माओवादी पृष्ठभूमि काफी पुरानी है।
- 2006: योगेंद्र ने भाकपा (माओवादी) संगठन में शामिल होकर लातेहार जिले के गारू सरजू इलाके का एरिया कमांडर पद संभाला।
- 2008: गिरफ्तारी के बाद जेल भेजा गया, लेकिन रिहा होते ही फिर संगठन से जुड़ गया।
- 2009: उसे सब-जोनल कमांडर बनाया गया।
- 2012: फिर गिरफ्तारी हुई और लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद 2022 में जेल से छूटा।
एसएसपी के मुताबिक जेल से रिहाई के बाद योगेंद्र ने क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों को फिर से सक्रिय करने की कोशिशें शुरू कर दी थीं।
Crime: छोटे व्यवसायियों को निशाना बना रहा था नेटवर्क
पुलिस ने बताया कि योगेंद्र और उसका गिरोह ठेकेदारों, ईंट भट्टा मालिकों और छोटे व्यवसायियों से रंगदारी वसूलकर संगठन को मजबूत करने की कोशिश में जुटा था। हाल ही में इस गिरोह ने सीसीएल के एक कर्मचारी से एक करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी थी, जिससे मामला सामने आया।पीड़ित कर्मचारी ने इस संबंध में पुलिस से संपर्क किया, जिसके बाद पुलिस ने छानबीन शुरू कर माओवादियों के नेटवर्क को बेनकाब कर दिया।
Crime: खलारी और मैक्लुस्कीगंज में दबिश
एसएसपी सिन्हा ने बताया कि पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि माओवादी खलारी और मैक्लुस्कीगंज के थाना क्षेत्रों में छिपे हुए हैं। इसके बाद विशेष टीमों ने इलाके में छापेमारी कर चारों को धर दबोचा। गिरफ्तारी के दौरान इनके पास से हथियार भी बरामद किए गए, जिससे साफ हुआ कि ये किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की तैयारी में थे।
Crime: माओवाद के खिलाफ पुलिस की बड़ी कामयाबी
कई जिलों में माओवादी लंबे समय से सक्रिय हैं और ठेकेदारों व उद्योगपतियों से जबरन वसूली इनकी आम रणनीति रही है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि इन गिरफ्तारियों से माओवादी नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। पुलिस अब इनके अन्य साथियों और स्थानीय सपोर्ट नेटवर्क की भी तलाश कर रही है। इसके लिए संबंधित थाना क्षेत्रों में निगरानी और खुफिया तंत्र को और मजबूत किया गया है।
क्षेत्र में माओवादी पुनर्संगठन की कोशिशें
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि योगेंद्र गंझू जैसे पुराने माओवादी कैडर जेल से छूटने के बाद फिर से संगठन को जमाने की कोशिश कर रहे हैं। जो छोटे व्यवसायियों और ईंट भट्टों से रंगदारी मांगकर वे फंड इकट्ठा कर रहे हैं। पुलिस ने स्थानीय लोगों से भी अपील की है कि अगर कोई माओवादी धमकी देता है या अवैध वसूली करता है तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।
एसएसपी ने कहा कि गिरफ्तार माओवादियों से गहन पूछताछ जारी है।उनसे पूछताछ के आधार पर पुलिस अन्य स्थानों पर भी छापेमारी करेगी।उन्होंने कहा कि माओवादियों की आर्थिक और हथियारों की सप्लाई चेन को तोड़ना पुलिस की प्राथमिकता है ताकि भविष्य में कोई बड़ी वारदात न हो सके।—