आज फिर हर भारतीय का सिर फक्र से ऊंचा हो गया, जब एक और भारतीय अंतरिक्ष यात्री ने सफलतापूर्वक इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में कदम रखा. इससे पहले भारत के राकेश शर्मा ने 1984 में अंतरिक्ष में 8 दिन बिताकर इतिहास के सुनहरे अक्षरों में अपना नाम दर्ज कराया था. अब 40 साल बाद, अब भारत ने एक और लाल को अंतरिक्ष में भेजा है, जो देश के दूसरे अंतरिक्ष यात्री बन गए हैं.

गगनयान मिशन में भी अंतरिक्ष जाएंगे शुभांशु
कैप्टन शुभांशु शुक्ला भारतीय अंतरिक्ष यात्री गगनयान मिशन से जुड़े हैं, जो भारत का पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन होगा. गगनयान को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने तैयार किया है. इसलिए इंटरनेशनल स्पेस में शुभांशु शुक्ला का जाना भारत के गगनयान मिशन के लिए भी बहुत खास है.
पोलैंड का दूसरा अंतरिक्ष यात्री 46 साल बाद
भारत के अलावा और भी देश के अंतरिक्ष यात्री इस मिशन का हिस्सा हैं, जिनमें पोलैंड की से इस मिशन में शामिल हुए हैं स्लावोज, जो एक इंजीनियर और मिशन स्पेशलिस्ट हैं. जो यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के तहत इस मिशन में हिस्सा ले रहे हैं.

स्लावोज पोलैंड के केवल दूसरे अंतरिक्ष यात्री हैं. उनसे पहले 1978 में पोलैंड के ही मिरोस्लाव हर्माशेव्स्की ने अंतरिक्ष की यात्रा की थी. इस तरह, 46 साल बाद पोलैंड को एक और अंतरिक्ष यात्री मिला है.
हंगरी भी लौटा अंतरिक्ष की दुनिया में
इस मिशन के तीसरे अंतरिक्ष यात्री हैं कापू, जो मैकेनिकल इंजीनियर हैं. जो हंगरी से ताल्लुक रखते हैं और अपने देश के दूसरे ऐसे व्यक्ति हैं जो रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष पहुंचे हैं. हंगरी का पिछला अंतरिक्ष मिशन 45 साल पहले हुआ था, जब बर्टालान फारकास ने साल 1980 में सोवियत मिशन से उड़ान भरी थी. उनके बाद अब कापू ने 21वीं सदी में हंगरी की वापसी को संभव किया.

अंतरिक्ष स्टेशन में कौन-कौन हैं मौजूद?
इस समय इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) में 7 अंतरिक्ष यात्री मौजूद हैं, जो अलग-अलग देशों का प्रतिनिधित्व करते हैं:
नासा (अमेरिका)
निकोल एयर्स
ऐनी मैकक्लेन
जॉनी किम
JAXA (जापान):
ताकुया ओनिशी
रूस (रोस्कोस्मोस):
किरिल पेसकोव
सर्गेई रियाज़िकोव
एलेक्सी ज़ुब्रित्स्की
तमाम देशों के इन सभी अंतरिक्ष यात्रियों का एकमात्र उद्देश्य है – इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में प्रयोग करना, पृथ्वी का अध्ययन करना और भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों के लिए डेटा जुटाना.

देशों की भागीदारी से बना ऐतिहासिक पल
Axiom-4 मिशन की सबसे खास बात यह है कि इसमें भारत, पोलैंड और हंगरी जैसे तीन अलग-अलग देश शामिल हैं. तीनों देशों ने अपने एक-एक मिशन विशेषज्ञ भेजे हैं, जो अंतरिक्ष विज्ञान, तकनीक और इंसानी क्षमता का परीक्षण करने में सहयोग कर रहे हैं.
इस मिशन से यह साफ है कि अब अंतरिक्ष इनोवेशन सिर्फ अमेरिका और रूस जैसे देशों तक सीमित नहीं रहा. अब भारत, पोलैंड और हंगरी जैसे देश भी इस दौड़ में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. इस साझा मिशन ने दुनिया को यह संदेश गया है कि विज्ञान और तकनीक में सहयोग से बड़ी से बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं.