बिहार में इंसानियत शर्मसार (AI IMAGE)
Purnia: पूर्णिया की उस रात की निस्तब्धता में कोई चीख नहीं गूंजी, लेकिन अगले दिन जब जले हुए पांच शव जलकुंभी से तैरते हुए मिले तो पूरा इलाका सन्न रह गया। बिहार के पूर्णिया जिले के टेटगामा गांव में जादू-टोना के शक में एक ही परिवार के 5 लोगों को बेरहमी से कत्ल कर जला दिया गया। इस दिल दहला देने वाली घटना ने मानवता को फिर कटघरे में खड़ा कर दिया।
Purnia: लाठी डंडे लेकर गई थी भीड़
बताया जा रहा है रविवार देर रात गांव के तकरीबन 30-40 लोग लाठी-डंडों लेकर बाबूलाल उरांव के घर पहुंचे। आरोपियों ने पहले बाबूलाल, उसकी पत्नी सीता देवी, बेटा मंजीत, बहू रानी देवी और एक अन्य महिला काली को बुरी तरह पीटा। इसके बाद इन सभी को ट्रैक्टर पर लादकर ले गए, जहां जिंदा जलाकर मार डाला। पुलिस ने जब अगली सुबह पांचों अधजले शव बरामद किए तो इंसानियत भी शर्मसार हो गई।
Purnia: कहां और कब हुई घटना?
बिहार के पूर्णिया जिले के मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के टेटमा गांव में रविवार रात (6-7 जुलाई) को ये दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। जहां बस जादू-टोना (काला जादू) करने का शक होने पर ही गांव के ही लगभग 30-40 लोगों की उन्मादी भीड़ ने एक ही परिवार के पांच सदस्यों — तीन महिलाएं और दो पुरुष — को बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया। मृतकों में सीता देवी, काली, रानी देवी, बाबूलाल और मंजीत राम शामिल हैं।
Purnia: घटना कैसे घटी?
दरअसल हाल ही में गांव में एक बच्चे की मौत हो गई थी। कुछ लोगों ने इसका दोष जादू-टोना पर मढ़ दिया और शक की सुई बाबूलाल के परिवार पर ठहर गई। रविवार रात को गांव में पंचायत बैठी, जहां कथित तौर पर बाबूलाल के परिवार को ‘डायन’ बताकर सज़ा तय कर दी गई। इसके बाद रात करीब 11 बजे नकुल उरांव और रामदेव उरांव के नेतृत्व में भीड़ बाबूलाल के घर पर टूट पड़ी। परिवार को घसीटकर बाहर लाया गया और उनकी हत्या कर दी गई। फिर उनके शवों को झाड़ियों में ले जाकर जला दिया गया।
Purnia: कौन पांचों हत्या का जिम्मेदार
बताया जा रहा है कि नकुल उरांव के नेतृत्व में ही पंचायत बैठी थी, जहां सामूहिक हत्या करने का फैसला किया गया. पंचायत का आग्रह रामदेव उरांव ने किया था जिसका बेटा हाल में ही बीमारी से मर गया था और दूसरा बीमार था. पंचायत ने खौफनाक फैसला लिया और देर रात लगभग 11 बजे भीड़ ने नकुल उरांव और रामदेव उरांव के नेतृत्व में बाबूलाल के घर पर हथियारों के साथ हमला बोल दिया.
अब तक की कार्रवाई
पुलिस ने बताया कि इस वारदात में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि कई और संदिग्ध हिरासत में लिए गए हैं। घटनास्थल पर फोरेंसिक टीम, डॉग स्क्वाड समेत आला अधिकारी पहुंचे हैं। इस मामले की जांच में तेजी लाने के लिए सीनियर अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण भी किया।
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सामाजिक पृष्ठभूमि और दर्दनाक सच्चाई
इस पूरे मामले ने एक बार फिर बिहार के ग्रामीण इलाकों में अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र की अंधविश्वासी दुनिया को उजागर कर दिया है। टेटगामा गांव के सारे मृतक एक विशेष जनजाति (आदिवासी) समुदाय से थे। अब यहां ग्रामीणों में इतनी दहशत है कि कई घरों में ताले लटके मिले। पशु भूखे खड़े हैं क्योंकि उनके मालिकों का कुछ अता-पता नहीं।
विपक्ष ने साधा सरकार पर निशाना
घटना को लेकर बिहार की राजनीति में उबाल आ गया है। राजद नेता तेजस्वी यादव ने इस नरसंहार को राज्य की बिगड़ती कानून व्यवस्था से जोड़ते हुए कहा कि पूर्णिया में एक ही परिवार के पांच लोगों को जिंदा जलाकर मार दिया गया। डीके टैक्स के कारण बिहार में अराजकता चरम पर, डीजीपी/मुख्य सचिव बेबस, कानून व्यवस्था ध्वस्त।
तेजस्वी ने हाल के महीनों में हुई दूसरी घटनाओं को भी गिनाया —सिवान, बक्सर और भोजपुर में भी इसी तरह की सामूहिक हत्याओं का जिक्र कर कहा कि मुख्यमंत्री अचेत हैं, अपराधी सतर्क।
पूर्णिया संसद पप्पू यादव ने क्या कहा
पप्पू यादव (पूर्णिया के निर्दलीय सांसद) ने कहा कि मैं शर्मिंदा हूं। दुनिया मंगल ग्रह पर पहुंच गई है और हमारे लोग जादू-टोने के शक में नरसंहार कर रहे हैं!बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश कुमार ने इसे ‘जंगलराज’ कहा और कहा कि राज्य में खासकर गरीब, दलित और आदिवासी पूरी तरह असुरक्षित हैं। मुख्यमंत्री चुप क्यों हैं?’’वहीं भाकपा (माले) लिबरेशन के राज्य सचिव कुणाल ने कहा कि यह घटना चौंकाने वाली है। यह नीतीश कुमार के राज में पूरी तरह ध्वस्त कानून व्यवस्था को दर्शाती है।
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सरकार के लिए एक और गंभीर अलार्म
पूर्णिया की यह घटना बिहार के लिए एक आईना है कि 21वीं सदी में भी अंधविश्वास की जड़ें कितनी गहरी हैं। नीतीश कुमार की सरकार पहले से ही कानून व्यवस्था को लेकर विपक्ष के निशाने पर है। अब इस भयावह नरसंहार ने न सिर्फ राज्य के प्रशासन बल्कि समाज के जागरूकता स्तर पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।