संयुक्त राष्ट्र सुरक्ष परिषद (UNSC) की 2 जून 2025 को हुई आपातकालीन बैठक में ईरान के परमाणु स्थलों (फोर्डो, नटंज, इस्फहान) पर अमेरिकी हमलों की कड़ी निंदा की गई.ईरान ने अमेरिका और इजरायल पर कूटनीति को नष्ट करने का आरोप लगाया, जबकि अमेरिका ने इन आरोपों को निराधार बताया. वहीं इस आपात बैठक में चीन और रूस ने भी अमेरिका की कड़ी आलोचना की, वहीं संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने शांति के लिए भावुक अपील की.
ईरान का रुख:
ईरान ने अमेरिका और इजरायल पर अपनी सुविधाओं को निशाना बनाने का आरोप लगाते हुए इसे “युद्ध की घोषणा” करार दिया. ईरानी राजदूत अमीर सईद इरवानी ने कहा कि इजराय और अमेरिका के ये हमले क्षेत्रीय शांति और वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा हैं. ईरान ने UNSC और IAEA से तत्काल कार्रवाई की मांग की.
इजरायल की प्रतिक्रिया:
इजरायल ने अपने हमलों को “राष्ट्रीय सुरक्षा” के लिए जरूरी बताया. इजरायली राजदूत डैनी डैनॉन ने ईरान पर परमाणु हथियारों को विकसित करने और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को धोखा देने का आरोप लगाया. इसके साथ ही उन्होंने UNSC से इजरायल का समर्थन करने की अपील की, यह कहते हुए कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम वैश्विक तौर पर बड़ा खतरा है.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव की अपील:
एंटोनियो गुटेरेस ने शांति के लिए भावुक अपील करते हुए कहा, “हम शांति के रास्ते को किसी हाल नहीं छोड़ नहीं सकते.” उन्होंने अमेरिकी हमलों को क्षेत्र में “खतरनाक मोड़” बताया और प्रतिशोध के चक्र को रोकने के लिए कूटनीति को खास तवज्जो देने की बात की. गुटेरेस ने IAEA निरीक्षकों को पूर्ण पहुंच देने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम के लिए “विश्वसनीय, सत्यापन योग्य समाधान” की मांग की.
चीन और रूस की निंदा:
चीन के राजदूत फू कांग ने इन हमलों को न सिर्फ अंतरराष्ट्रीयचीन के राजदूत फू कांग ने इन हमलों को न सिर्फ अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करार दिया बल्कि तत्काल युद्धविराम की मांग की. रूस के वसीली नेबेन्ज़्या ने अमेरिका पर “मानवता की सुरक्षा के साथ खिलवाड़” करने का आरोप लगाया, कानून का उल्लंघन करार दिया बल्कि तत्काल युद्धविराम की मांग की. रूस के वसीली नेबेन्ज़्या ने अमेरिका पर “मानवता की सुरक्षा के साथ खिलवाड़” करने का आरोप लगाया, चेतावनी दी कि इन हमलों ने “पैंडोरा बॉक्स” खोल दिया है.
इस बैठक में तनावपूर्ण माहौल रहा, जिसमें कूटनीति और संयम की पुकार के बीच देशों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए। गुटेरेस ने चेतावनी दी कि सैन्य तनाव से क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता को गंभीर खतरा है, और कूटनीति ही एकमात्र रास्ता है.