रोहित शर्मा और विराट कोहली (सोर्स- सोशल मीडिया)
Rohit Sharma And Virat Kohli: एशिया कप 2025 से पहले भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) खिलाड़ियों की फिटनेस को लेकर पूरी तरह सतर्क हो गया है। इसी क्रम में भारतीय कप्तान रोहित शर्मा समेत कुल 6 क्रिकेटर बेंगलुरु स्थित BCCI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE) पहुंच गए हैं। सभी खिलाड़ियों की बारीकी से फिटनेस जांच की जा रही है, ताकि वे एशिया कप से पहले पूरी तरह तैयार रहें।
सबसे पहले होगा DEXA और ब्लड टेस्ट
सेंटर में खिलाड़ियों के लिए सबसे पहले DEXA स्कैन किया जाएगा, जो शरीर की हड्डियों की मजबूती और संरचना को जांचने के लिए किया जाता है। इसके अलावा, ब्लड टेस्ट के जरिए उनके स्वास्थ्य से जुड़ी बारीकियों को परखा जाएगा। ये सभी टेस्ट खिलाड़ियों की समग्र फिटनेस का आकलन करने के लिए ज़रूरी हैं।
सूर्यकुमार और गिल भी पहुंचे COE
एशिया कप के लिए चुनी गई भारतीय टीम के दो अहम खिलाड़ी – सूर्यकुमार यादव और शुभमन गिल – भी दुबई रवाना होने से पहले बेंगलुरु में फिटनेस टेस्ट देने पहुंचे हैं। उनके अलावा तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज भी COE में अपनी जांच करवा रहे हैं। इन खिलाड़ियों के लिए यह फिटनेस टेस्ट इसलिए भी अहम है क्योंकि एशिया कप के बाद ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू सीरीज का आयोजन भी होना है।
रोहित शर्मा के टेस्ट पर सबकी नजरें
कप्तान रोहित शर्मा पिछले कुछ समय से अपनी फिटनेस को लेकर चर्चा में रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि यह टेस्ट उनके लिए बेहद अहम साबित हो सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, रविवार से टेस्ट प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। यह टेस्ट रोहित की भविष्य की योजनाओं, खासकर 2027 वनडे वर्ल्ड कप के लिए उनकी मौजूदगी, को लेकर संकेत दे सकता है।
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विराट कोहली को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं
विराट कोहली की फिटनेस टेस्ट को लेकर अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बीसीसीआई के एक अधिकारी के अनुसार, अनुबंध के अनुसार सभी खिलाड़ियों को हर सीजन की शुरुआत में फिटनेस टेस्ट से गुजरना जरूरी है। COE में हो रहे टेस्ट से बोर्ड यह समझ पाएगा कि खिलाड़ियों में किस स्तर पर सुधार की जरूरत है।
BCCI का नया ब्रोंको टेस्ट
BCCI ने हाल ही में खिलाड़ियों के लिए ब्रोंको टेस्ट को भी लागू किया है। इस टेस्ट में खिलाड़ियों को 20, 40 और 60 मीटर की शटल रनिंग करनी होती है। उन्हें 6 मिनट में कुल 1200 मीटर की दौड़ पूरी करनी होती है और इस दौरान उन्हें कोई ब्रेक नहीं दिया जाता। यह टेस्ट खिलाड़ियों की स्टैमिना और सहनशक्ति को परखने के लिए एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है।