भारत ने ऑपरेशन सिंदूर में तीन मुल्कों से लड़ी जंग
Operation Sindoor: भारतीय सेना के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर. सिंह ने आज ऐसा खुलासा किया जिसके बारे में जानकार हर कोई दंग रह गया। असल में ये खुलासा ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ा है। उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर. सिंह ने कहा कि चीन ने मई में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए चार दिवसीय सैन्य संघर्ष को “प्रयोगशाला” की तरह इस्तेमाल किया, ताकि वह अपने हथियारों और सैन्य तकनीक को टेस्ट कर सके। उन्होंने कहा कि चीन ने प्राचीन रणनीति — “दूसरे के कंधे पर बंदूक रखकर गोली चलाना” — के तहत पाकिस्तान को हरसंभव मदद दी, ताकि बिना खुद सीधे भिड़े भारत को नुकसान पहुंचाया जा सके।
Operation Sindoor: ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने तीन देशों से लड़ी जंग
लेफ्टिनेंट जनरल सिंह ‘फिक्की’ द्वारा आयोजित एक इवेंट बोल रहे थे। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान केवल “सामने से दिखाई दे रहा चेहरा” था, असली खेल तो पीछे से चीन खेल रहा था। इतना ही नहीं, तुर्किये भी पाकिस्तान को सैन्य उपकरण देकर इस पूरे घटनाक्रम में अहम भूमिका निभा रहा था।
उन्होंने कहा, “7 से 10 मई के बीच जब सीमा पर संघर्ष अपने चरम पर पहुंच चुका था, तब भारत असल में एक साथ कम से कम तीन दुश्मनों से जूझ रहा था — पाकिस्तान, चीन और तुर्किये के एक साथ आ रहे सैन्य संसाधनों से।”
Operation Sindoor: चीन अपने सैटेलाइट से भारत पर रख रहा था नजर
उप सेना प्रमुख ने बताया कि चीन अपने सैटेलाइट से भारतीय सैन्य तैयारियों पर नजर रख रहा था और यही जानकारी पाकिस्तानी सेना को डीजीएमओ स्तर की बातचीत में सीधे मिल रही थी।
“जब हमारी पाकिस्तानी सेना से डीजीएमओ स्तर की बातचीत हो रही थी, तब हमसे उन्होंने कहा कि हमें पता है आपका ‘वेक्टर’ (मिसाइल सिस्टम) एक्टिव है, कृपया उसे हटा लें। जाहिर सी बात है कि मतलब था कि उन्हें चीन से रियल-टाइम इनपुट मिल रहे थे।”
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Operation Sindoor: चीन ने पाकिस्तान के कंधे पर रखकर चलाई बंदूक
उन्होंने चीन की “36 प्राचीन सैन्य चालों” का जिक्र करते हुए कहा, “दूसरे के कंधे पर बंदूक रखकर दुश्मन को मारना यही दर्शाता है कि खुद को सीधा झोंके बिना किसी तीसरे के जरिए सामने वाले पर वार करना और चीन ने ऐसा ही किया। चीन ने पाकिस्तान को भारत के खिलाफ इसी लिहाज से इस्तेमाल किया।”
लेफ्टिनेंट जनरल सिंह ने कहा कि पाकिस्तान को चीन का समर्थन वैसे कोई नई बात नहीं है। “अगर आप आंकड़े देखें, तो पिछले पांच सालों में पाकिस्तान को मिले सैन्य उपकरणों में से 81 फीसदी तो सिर्फ चीन से मिले हैं। ऐसे में जब हमारे साथ उनका संघर्ष हुआ, तो हमें इसमें किसी तरह की कोई हैरानी नहीं हुई कि चीन खुलकर पाकिस्तान की मदद कर रहा था।”
Operation Sindoor: तुर्किये भी भारत की पीठ में घोंप रहा था छुरी
तुर्किये की भूमिका पर भी उन्होंने कहा, “हमने युद्ध क्षेत्र में कई ड्रोन देखे, जो आसमान में उड़ते रहे। वहां मौजूद व्यक्तियों की गतिविधियां भी साफ नजर आ रही थीं। तुर्किये की सप्लाई ने इस्लामाबाद को और मजबूत किया।” उन्होंने जोर दिया कि इस संघर्ष से भारत को जरूरी सबक लेने चाहिए। “सी4आईएसआर (कमांड, कंट्रोल, कम्युनिकेशन, कंप्यूटर, इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रीकॉनिसन्स) और सिविल-मिलिट्री के तालमेल को लेकर अभी अभी हमें बहुत कुछ करना बाकी है।”
उन्होंने यह भी बताया कि भारत की तरफ से रणनीतिक संदेश एकदम साफ था। “हमने पाकिस्तान और पीओके में अपने लक्ष्यों का चयन बेहद सटीक डेटा के हिसाब से ही किया। जब 22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकी हमला हुआ, उसके जवाब में 7 मई को हमने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की शुरुआत की। इन हमलों के चलते पाकिस्तान को आखिरकार 10 मई को पाकिस्तान को भारत के सामने युद्धविराम की गुहार लगानी पड़ी।”
उप सेना प्रमुख ने कहा, “हमें तेजी से अपनी क्षमताओं को और भी अपग्रेड करना होगा, ताकि आने वाले भविष्य में कोई देश भारत के खिलाफ ऐसी चालें न चल सके।”