प्रतीकात्मक तस्वीर
Nipah Virus Outbreak: केरल में निपाह वायरस बीमारी के दो मामलों की पुष्टि के बाद केंद्रीय निगरानी इकाई (IDSP) और राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) की टीम सक्रिय रूप से स्थिति पर नजर बनाए हुए है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए एक नेशनल जॉइंट आउटब्रेक रिस्पॉन्स टीम (NJORT) को भेजने पर विचार किया जा रहा है। राज्य नियंत्रण कक्ष (Control Room) को पहले ही सक्रिय कर दिया गया है ताकि संक्रमण को रोकने के लिए जरूरी कदम तेजी से उठाए जा सकें।
पहला मामला: 18 साल की लड़की की मौत
सरकारी सूत्रों के अनुसार, पहला पुष्ट मामला मलप्पुरम जिले की रहने वाली 18 वर्षीय बिशारा नहरिन का है। वह ग्रामीण क्षेत्र की निवासी थीं, जहां पास में जंगल और फलदार बाग-बगीचे हैं। यह इलाका फल चमगादड़ों की आवाजाही के लिए जाना जाता है, जो निपाह वायरस के मुख्य वाहक माने जाते हैं। बिशारा की हालत बिगड़ने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन इलाज के दौरान 1 जुलाई 2025 को उसकी मौत हो गई।
उनके पोस्टमार्टम के लिए लिए गए नमूने—जैसे कि सीरम, सीएसएफ, नाक का सैंपल (NPS) और फेफड़ों के ऊतक—2 जुलाई को कोझिकोड मेडिकल कॉलेज स्थित क्षेत्रीय वायरोलॉजी लैब (VRDL) भेजे गए थे। जांच में सभी नमूने RT-PCR टेस्ट में निपाह वायरस के लिए पॉजिटिव पाए गए।
दूसरा मामला: 38 वर्षीय महिला वेंटिलेटर पर
दूसरी मरीज, हसनत नाम की 38 वर्षीय महिला हैं, जो पलक्कड़ जिले की रहने वाली हैं। उन्हें मलप्पुरम के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है और वह फिलहाल वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं। 4 जुलाई को उनके सैंपल नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) पुणे भेजे गए थे, जहां उनकी रिपोर्ट भी निपाह वायरस पॉजिटिव आई।
300 से ज्यादा संपर्कों की पहचान
सरकारी सूत्रों ने बताया कि तीन जिलों (पलक्कड़, मलप्पुरम और कोझिकोड) में अब तक 300 से अधिक लोगों को संभावित संपर्कों के रूप में चिन्हित किया गया है। इन सभी का ट्रैकिंग और निगरानी का काम शुरू कर दिया गया है ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।
सरकार की सक्रियता
राज्य और केंद्र की टीमें मिलकर स्थिति पर नजर रखे हुए हैं और हरसंभव प्रयास कर रही हैं कि वायरस आगे न फैले। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जागरूकता फैलाने के साथ-साथ इलाके को सैनिटाइज करने, मरीजों की ट्रैकिंग और टेस्टिंग बढ़ाने का काम तेजी से चल रहा है।
निपाह वायरस क्या है?
निपाह वायरस एक घातक बीमारी है, जो चमगादड़ों के जरिए इंसानों में फैलती है। यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से भी फैल सकता है और इसकी मृत्यु दर बहुत अधिक होती है। यही वजह है कि हर बार इसके मामले सामने आने पर सरकारें हाई अलर्ट पर आ जाती हैं।