कलाष्टमी 2025 (सोर्स- सोशल मीडिया)
Kalashtami 2025: भगवान शिव के रौद्र रूप काल भैरव को समर्पित कालाष्टमी व्रत हर माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस बार भाद्रपद माह की कालाष्टमी 16 अगस्त 2025, शनिवार को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान काल भैरव की पूजा करने से सभी प्रकार के दुख और कष्ट दूर होते हैं तथा हर मनोकामना पूरी होती है। इस पावन अवसर पर भक्त विशेष पूजा-अर्चना करते हैं और भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए व्रत रखते हैं।
शुभ मुहूर्त और पूजा का समय
पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 15 अगस्त को रात 11:49 बजे शुरू होकर 16 अगस्त को रात 9:34 बजे समाप्त होगी। काल भैरव की पूजा विशेष रूप से निशा काल में की जाती है। इस बार निशा काल में पूजा का शुभ समय रात 11:19 बजे से 12:03 बजे तक रहेगा। इसी अवधि में भगवान काल भैरव का पूजन सबसे शुभ माना जाएगा।
कालाष्टमी पर बन रहे शुभ योग
ज्योतिषियों के अनुसार, इस बार भाद्रपद मास की कालाष्टमी पर वृद्धि और ध्रुव योग का संयोग बन रहा है। वृद्धि योग सुबह 7:21 बजे तक रहेगा। ऐसा माना जाता है कि ध्रुव योग में भगवान काल भैरव की पूजा करने से साधक को दोगुना फल प्राप्त होता है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
पंचांग
- सूर्योदय – सुबह 5:14 बजे
- सूर्यास्त – शाम 6:07 बजे
- ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 3:45 बजे से 4:29 बजे तक
- विजय मुहूर्त – दोपहर 1:50 बजे से 2:41 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त – शाम 6:07 बजे से 6:30 बजे तक
- निशिता मुहूर्त – रात 11:19 बजे से 12:03 बजे तक
कालाष्टमी व्रत एवं पूजन विधि
- अष्टमी तिथि को सूर्योदय से पहले उठकर भगवान काल भैरव का ध्यान करें।
- घर की साफ-सफाई करने के बाद गंगाजल युक्त जल से स्नान करें।
- आचमन कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- सबसे पहले सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें।
- इसके बाद पंचोपचार या षोडशोपचार विधि से भगवान शिव और काल भैरव का पूजन करें।
- पूजन के समय फल, फूल, बिल्वपत्र, धूप, दीप और मिठाई अर्पित करें।
- शिव चालीसा का पाठ करें और “ॐ कालभैरवाय नमः” मंत्र का जाप करें।
- शाम को पुनः भगवान शिव की आरती करें और सुख-समृद्धि व कल्याण की प्रार्थना करें।
भाद्रपद मास की कालाष्टमी विशेष फलदायी मानी जाती है। इस दिन श्रद्धा और भक्ति से भगवान काल भैरव की पूजा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, सुरक्षा और सफलता प्राप्त होती है।