भगवान गणेश (सोर्स- सोशल मीडिया)
Ganesh Chaturthi: सावन माह के समापन के साथ ही भादो माह की शुरुआत हो चुकी है। यह महीना भगवान श्री गणेश की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। हर साल की तरह इस बार भी 10 दिनों तक गणेशोत्सव की धूम देखने को मिलेगी। इस दौरान घरों और पंडालों में गणपति की स्थापना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं और वास्तु शास्त्र के अनुसार गणपति स्थापना के कुछ खास नियम होते हैं, जिनका पालन करने से सुख, शांति और समृद्धि आती है।
गणपति स्थापना के वास्तु नियम
वास्तु शास्त्र के अनुसार, गणपति जी की मूर्ति या चित्र को घर के मुख्य द्वार के अंदर की ओर लगाना शुभ माना जाता है। घर में बाईं सूंड वाले गणपति रखना अत्यंत मंगलकारी होता है, जिससे घर में खुशहाली बनी रहती है। टूटी-फूटी या खंडित मूर्ति रखना अशुभ माना जाता है, क्योंकि इससे नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ सकता है।
मुख्य द्वार के दोनों ओर गणपति जी की दो मूर्तियां या चित्र लगाने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे वास्तु दोष उत्पन्न हो सकता है। गणपति जी का चित्र मुख्य द्वार के ऊपर या अंदर लगाना शुभ माना जाता है। साथ ही, गणपति जी का मुख घर के अंदर की ओर होना चाहिए, ताकि सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह घर में प्रवेश करे। उनकी पीठ घर के अंदर की ओर नहीं होनी चाहिए, क्योंकि इसे दरिद्रता और आर्थिक संकट का कारण माना जाता है।
गणपति के पीछे दर्पण रखने का महत्व
वास्तु शास्त्र में गणपति जी की मूर्ति के पीछे दर्पण रखने की परंपरा का विशेष महत्व है। इसका मुख्य कारण यह है कि जब गणपति जी की पीठ दिखती है, तो इसे अशुभ माना जाता है, क्योंकि यह दरिद्रता और नकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक मानी जाती है। दर्पण लगाने से उनकी पीठ प्रतिबिंबित नहीं होती और यह दोष दूर हो जाता है।
यदि घर में वास्तु दोष है, तो गणपति जी की मूर्ति के पीछे दर्पण रखने से उसका प्रभाव कम हो सकता है। यह भी माना जाता है कि दर्पण लगाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है और नकारात्मकता समाप्त होती है।
पूजा स्थल और मुख्य द्वार पर दर्पण का उपयोग
गणपति स्थापना के बाद, विशेष रूप से मुख्य द्वार या पूजा स्थल पर उनकी मूर्ति के पीछे दर्पण रखना शुभ होता है। यह न केवल वास्तु दोषों से रक्षा करता है, बल्कि घर में सुख, शांति और समृद्धि बनाए रखने में भी सहायक होता है।
भादो माह का यह शुभ अवसर न केवल गणपति स्थापना के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि सही दिशा और नियमों का पालन करके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का भी अवसर देता है।