संस्कृत दिवस का आयोजन
Bihar Mahatma Gandhi Central University: महात्मा गांधी केन्द्रीय विश्वविद्यालय में संस्कृत विभाग एवं संस्कृत भारती के संयुक्त तत्वावधान में श्रावण शुक्ल पूर्णिमा के पावन अवसर पर “संस्कृत दिवस” का सफलतापूर्वक आयोजन आभासी पटल पर किया गया, जिसका उद्देश्य संस्कृत भाषा के महत्व और गौरव को जनमानस में पुनः प्रतिष्ठित करना था।
कार्यक्रम के मुख्य संरक्षक माननीय कुलपति प्रो. संजय श्रीवास्तव तथा संरक्षक गांधी भवन के परिसर निदेशक प्रो. प्रसून दत्त सिंह के निर्देशन में संपन्न हुआ। संयोजक संस्कृत विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. श्याम कुमार झा तथा संस्कृत विभाग के सहायक आचार्य डॉ. बबलू पाल एवं डॉ. विश्वजीत बर्मन सह संयोजक के रूप में उपस्थित रहे।
संस्कृत भाषा का स्वरूप
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में बी.आर. बिहार विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त आचार्य प्रो. श्रीप्रकाश पाण्डेय ने संस्कृत भाषा के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक स्वरूप पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल प्राचीन ज्ञान-विज्ञान का भंडार ही नहीं, बल्कि आधुनिक विज्ञान, प्रौद्योगिकी, योग, आयुर्वेद और दर्शनशास्त्र के लिए भी अति आवश्यक है।
सामान्य जनों तक संस्कृत पहुंचाना कर्तव्य
संयोजक डॉ. श्याम कुमार झा ने अपने वक्तव्य में कहा कि संस्कृत वैज्ञानिक भाषा है, जिसे सामान्य जनों तक पहुंचाना संस्कृत अनुरागियों का कर्तव्य होना चाहिए और इसके लिए आवश्यक है कि स्थान- स्थान पर संस्कृत भारती द्वारा आयोजित 10 दिनात्मक संभाषण शिविर के आयोजन किये जाएं।
उक्त कार्यक्रम में विभाग के शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों की अच्छी उपस्थिति रही। स्नातोकत्तर प्रथमवर्षीया छात्रा श्रेयसी दास के द्वारा वाग्देवी स्वरस्वती की आराधना से कार्यक्रम का आरम्भ हुआ। शोध छात्र अजय चन्द्र दास ने ध्येय मंत्र का पाठ किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. विश्वजीत वर्मन के द्वारा किया गया।
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केन्द्रीय विश्वविद्यालय में संस्कृत सप्ताहोत्सव
इससे पहले भी महात्मा गांधी केन्द्रीय विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग और संस्कृत भारती के संयुक्त तत्वावधान में संस्कृत सप्ताह महोत्सव का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम के मुख्य संरक्षक माननीय कुलपति प्रो. संजय श्रीवास्तव तथा संरक्षक गांधी भवन के परिसर निदेशक प्रो. प्रसून दत्त सिंह उपस्थित रहे।
Sanskrit week-festival: सभी भाषाओं की जननी संस्कृत
कार्यक्रम का शुभारम्भ संस्कृत विभाग के शोधच्छात्र सुखेन घोष द्वारा वैदिक मंङ्गलाचरण तथा श्रेयसी दास द्वारा लौकिक मंगलाचरण से हुआ। संस्कृत भाषा की महत्ता बताते हुए प्रो. प्रसून दत्त सिंह ने कहा संस्कृत भाषा का महत्व वैदिक काल से ही है। यह सभी भाषाओं की जननी है। संस्कृत भाषा का महत्व न केवल कर्मकाण्ड, ज्योतिष एवं साहित्य में ही है, अपितु विज्ञान, टेक्नोलॉजी, फिल्म में भी नयी संभावना और रोजगार के अवसर हैं।
संयोजक संस्कृत विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. श्याम कुमार झा तथा संस्कृत विभाग के सहायक आचार्य डॉ. बबलू पाल एवं डॉ. विश्वजीत बर्मन ने सह संयोजक के रूप में मार्गदर्शन दिया। मुख्य अतिथि के रूप में अंग्रेजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. विमलेश कुमार सिंह उपस्थित रहे।