सुनील गावस्कर (सोर्स- सोशल मीडिया)
Sunil Gavaskar: मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (एमसीए) ने भारतीय क्रिकेट के दो दिग्गजों सुनील गावस्कर और शरद पवार को अनोखे अंदाज़ में सम्मानित करने का फैसला किया है। मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में इन दोनों हस्तियों की प्रतिमा लगाई जाएंगी। यह प्रतिमाएं हाल ही में तैयार किए गए “एमसीए शरद पवार क्रिकेट संग्रहालय” के प्रवेश द्वार पर स्थापित की जाएंगी। इसकी घोषणा 31 जुलाई को की गई और यह खबर क्रिकेट प्रशंसकों के बीच उत्साह का विषय बन गई है।
क्रिकेट संग्रहालय को समर्पित किया जाएगा शरद पवार का नाम
एमसीए द्वारा बनाए जा रहे इस संग्रहालय को “एमसीए शरद पवार क्रिकेट संग्रहालय” नाम दिया गया है, जो मुंबई और भारतीय क्रिकेट के दिग्गजों की कहानियों, उपलब्धियों और यादगार पलों को सहेजने का काम करेगा। संग्रहालय का उद्घाटन जुलाई के अंत तक किया जाएगा और यह क्रिकेट की विरासत को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा।
सुनील गावस्कर की मूर्ति से प्रेरणा लेंगे युवा
संग्रहालय के प्रवेश द्वार पर सुनील गावस्कर की प्रतिमा लगाई जाएगी। भारतीय क्रिकेट के ‘लिटिल मास्टर’ कहे जाने वाले गावस्कर ने इस सम्मान को लेकर भावुक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “यह मेरे लिए गर्व का पल है। एमसीए मेरा मातृसंस्थान है जिसने मुझे क्रिकेट में पहला मंच दिया। आज उसी संस्था ने मुझे इतना बड़ा सम्मान दिया है, यह मेरे करियर का सबसे यादगार क्षणों में से एक है।”
गावस्कर भारत के पहले बल्लेबाज़ बने जिन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 10,000 रन पूरे किए। उन्होंने 125 टेस्ट में 10,122 रन बनाए, जिसमें 34 शतक और 45 अर्धशतक शामिल हैं। वनडे क्रिकेट में भी उन्होंने 108 मैचों में 3,092 रन बनाए। तकनीकी रूप से दक्ष और विश्वसनीय बल्लेबाज़ के रूप में उनकी गिनती सर्वकालिक महान खिलाड़ियों में होती है।
शरद पवार के योगदान को स्थायी सम्मान
पूर्व बीसीसीआई और एमसीए अध्यक्ष शरद पवार के लंबे क्रिकेट प्रशासनिक योगदान को ध्यान में रखते हुए संग्रहालय को उनके नाम पर समर्पित किया गया है। पवार ने बीसीसीआई, आईसीसी और एमसीए में शीर्ष पदों पर रहते हुए भारतीय क्रिकेट को नई दिशा दी। उनके नेतृत्व में भारत ने 2011 विश्व कप की सफलतापूर्वक मेज़बानी की और घरेलू क्रिकेट की नींव को मज़बूती दी।
एमसीए अध्यक्ष का बयान
एमसीए अध्यक्ष ने कहा कि यह संग्रहालय मुंबई क्रिकेट की गौरवशाली विरासत का प्रतीक होगा। सुनील गावस्कर की मूर्ति संघर्ष, समर्पण और प्रेरणा का प्रतीक बनेगी, जबकि शरद पवार का योगदान युवा प्रशासकों के लिए मार्गदर्शन का स्रोत रहेगा।