इंग्लैंड में इस्तेमाल हो रही गेंद पर सवाल (सोर्स- सोशल मीडिया)
Dukes Ball: भारतीय कप्तान शुभमन गिल और इंग्लैंड के पूर्व तेज़ गेंदबाज़ स्टुअर्ट ब्रॉड ने ड्यूक्स गेंद की गुणवत्ता पर सार्वजनिक तौर पर नाराज़गी ज़ाहिर की थी। इसके बाद इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) ने फैसला लिया है कि सप्ताह के अंत तक वे ड्यूक्स गेंद बनाने वाली कंपनी को इस्तेमाल की गई अधिक से अधिक गेंदें लौटा देंगे।
कंपनी बोली- अगर ज़रूरी लगा तो करेंगे बदलाव
‘ड्यूक्स’ गेंद का निर्माण करने वाली कंपनी ‘ब्रिटिश क्रिकेट बॉल्स लिमिटेड’ के मालिक दिलीप जजोदिया ने बीबीसी से बातचीत में कहा, “हम इन गेंदों का निरीक्षण करेंगे और उनकी गुणवत्ता की जांच करेंगे। इसके बाद निर्माण से जुड़े लोगों से बात कर ज़रूरी कार्रवाई की जाएगी। अगर हमें लगेगा कि कुछ बदलने की ज़रूरत है, तो हम वो भी करेंगे।”
मैच के दौरान बार-बार बदलनी पड़ी गेंदें
पांच टेस्ट मैचों की इस सीरीज़ में एक बड़ी समस्या यह रही कि ड्यूक्स गेंद लगभग 30 ओवर के भीतर ही नरम या खराब हो जा रही थी। इस वजह से अंपायरों को बार-बार गेंद बदलनी पड़ी, जिससे खेल में देरी भी हुई।
गौरतलब है कि टेस्ट सीरीज़ के लिए किस प्रकार की गेंद इस्तेमाल होगी, इसका फैसला मेज़बान बोर्ड करता है। इंग्लैंड में ड्यूक्स गेंद का इस्तेमाल होता है। भारत में SG गेंद से टेस्ट मैच खेले जाते हैं। ऑस्ट्रेलिया में कूकाबुरा गेंद प्रयोग में लाई जाती है।
क्या है ड्यूक्स गेंद की खासियत?
ड्यूक्स गेंद को खासतौर पर उसकी मजबूत सीम और टिकाऊ बनावट के लिए जाना जाता है। यह गेंद हाथ से सिली जाती है, जिससे इसकी सीम अधिक उभरी हुई होती है।
गेंद के दो हिस्सों को जोड़ने वाले कप्स पर छह पंक्तियों में सिलाई की जाती है।
अगर गेंद की अच्छी तरह देखभाल की जाए तो इसकी सीम लंबे समय तक बनी रहती है।
इंग्लैंड की परिस्थितियों में यह गेंद अधिक स्विंग करती है और पिच से मूवमेंट भी देती है।
इंग्लिश कंडीशंस में क्यों फायदेमंद होती है ड्यूक्स गेंद?
इंग्लैंड की जलवायु और पिचें ड्यूक्स गेंद के लिए बेहद मुफीद मानी जाती हैं। यहां अक्सर बादल छाए रहते हैं, वातावरण में नमी होती है और घास वाली पिचों के कारण गेंद अधिक स्विंग और उछाल देती है। हालांकि, गेंद का असर इस बात पर भी निर्भर करता है कि गेंदबाज़ उसे किस तरह इस्तेमाल करता है।
कीमत और वजन
रिपोर्ट्स के मुताबिक ड्यूक्स गेंद का वजन लगभग 155 से 163 ग्राम के बीच होता है। इसकी कीमत लगभग ₹10,000 से ₹15,000 तक बताई जाती है। यह गेंद अंतरराष्ट्रीय टेस्ट क्रिकेट में उच्च गुणवत्ता की मानी जाती है, लेकिन इस बार इसके प्रदर्शन ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
निगाहें जांच पर टिकीं
अब जब ड्यूक्स गेंद बनाने वाली कंपनी ने आधिकारिक तौर पर इसकी जांच की बात कही है, तो क्रिकेट प्रेमियों की निगाहें इस पर टिकी हैं कि आगे क्या बदलाव किए जाते हैं। यह भी देखना दिलचस्प होगा कि क्या भविष्य की टेस्ट सीरीज़ में ड्यूक्स गेंद को लेकर कोई नई गाइडलाइन या तकनीकी सुधार सामने आते हैं।