कम नहीं हो रही कांग्रेस नेता की मुसीबत
Yogendra Sao: झारखंड में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आज एक बार फिर बड़ी कार्रवाई करते हुए राज्य के पूर्व कृषि मंत्री और कांग्रेस नेता योगेंद्र साव और उनके परिवार के सदस्यों पर शिकंजा कस दिया। ईडी ने हजारीबाग और रांची समेत कम से कम 8 स्थानों पर छापेमारी की, जहां से कई अहम दस्तावेज और डिजिटल सबूत जुटाए हैं। यह पूरा मामला अवैध रेत खनन, जबरन वसूली और कथित भूमि कब्जे से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है।
Yogendra Sao: सुबह-सुबह एक साथ कई जगहों पर मारे छापे
ईडी की यह (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत की गई। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, ईडी की टीमें सुबह ही रांची और हजारीबाग में अलग-अलग ठिकानों पर पहुंच गईं। यहां पूर्व मंत्री योगेंद्र साव, उनकी बेटी और झारखंड की चर्चित विधायक अंबा प्रसाद समेत उनके परिवार से जुड़े कई परिसरों को घेरा। ईडी टीम ने घर और दफ्तरों में घंटों तलाशी ली और कई दस्तावेज, कंप्यूटर-लैपटॉप तथा मोबाइल फोन कब्जे में लिये। बताया जाता है कि छापेमारी के दौरान कई संदिग्ध लेन-देन और प्रॉपर्टी से जुड़ी अहम फाइलें भी बरामद हुई हैं।
Yogendra Sao: पूर्व मंत्री पर क्या हैं आरोप?
ईडी इस बात की जांच कर रहा है कि कैसे जबरन वसूली, अवैध रेत खनन और ज़मीन पर अवैध कब्जों के ज़रिए करोड़ों रुपये का काला धन कमाया गया। इस पूरी राशि को कथित तौर पर वैध दिखाने के लिए कई फर्जी कंपनियों और बेनामी संपत्तियों का सहारा लिया गया। ईडी को शक है कि रेत घाटों के ठेके दिलवाने से लेकर वसूली में कई प्रभावशाली लोग शामिल हैं।
Yogendra Sao: पहले भी हो चुकी है ईडी की कार्रवाई
यह कोई पहला मौका नहीं है जब ईडी ने योगेंद्र साव और उनके परिवार पर कार्रवाई की हो। पिछले साल भी ईडी ने हजारीबाग और रांची में उनसे जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। तब भी पूर्व मंत्री से घंटों पूछताछ हुई थी। उनकी बेटी अंबा प्रसाद जो खुद भी विधायक हैं, उनके खिलाफ भी धनशोधन के मामलों की जांच चल रही है। पिछले साल की छापेमारी में ईडी को कई संदिग्ध दस्तावेज हाथ लगे थे, जिसके बाद से मामला और भी पेंचीदा हो गया।
Yogendra Sao: परिवार पर बढ़ते शिकंजे से सियासी हलचल भी तेज
ईडी की इस कार्रवाई से झारखंड की सियासत में हलचल तेज होने लगी है। कांग्रेस के कई नेता इसे बदले की कार्रवाई बता रहे हैं। वहीं भाजपा नेताओं का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है और जिन्होंने जनता के संसाधनों की लूट की है, उन्हें इसका हिसाब देना होगा। पूर्व मंत्री योगेंद्र साव ने पहले भी इन आरोपों को राजनीतिक साजिश करार दिया था और कहा था कि उनके परिवार को झूठे मामलों में जान बूझ के फंसाया जा रहा है।
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क्या कहता है ईडी का पक्ष?
इस मामले में ईडी अधिकारियों का कहना है कि उनके पास इस मामले से जुड़ी पुख्ता जानकारी और सबूत हैं। अधिकारियों के मुताबिक, यह कार्रवाई पूरी तरह कानून के तहत और कोर्ट की निगरानी में हो रही है। जांच एजेंसी की कोशिश है कि इस अवैध रेत कारोबार और जबरन वसूली के नेटवर्क की पूरी जड़ तक पहुंचा जाए ताकि इसके पीछे बैठे असली मास्टरमाइंड को भी पकड़ा जा सके।
आगे क्या?
फिलहाल ईडी ने छापेमारी में जब्त दस्तावेजों और डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच करनी शुरू कर दी है। एजेंसी सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में योगेंद्र साव, उनकी बेटी अंबा प्रसाद और अन्य परिजनों पर फिर शिकंजा कसा जा सकता है। साथ ही कई ठेकेदारों, सरकारी अफसरों और कथित दलालों को भी नोटिस भेजकर पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा। झारखंड में रेत खनन और ज़मीन के मामलों को लेकर हमेशा से विवाद रहा है।