रिश्वतखोर डॉक्टर रंगे हाथ दबोचा गया
Hazaribagh Doctor Bribe: झारखंड में सरकारी अफसर से लेकर डॉक्टर तक भ्रष्टाचार में किस तरह शामिल है, इसका ताजा मामला हजारीबाग जिले के चौपारण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से आया है, जहां मसीहा माने वाले एक डॉक्टर को मरीजों के स्वास्थ्य से कहीं अधिक अपनी जेब भरने की चिंता थी। आम जनता की गाढ़ी कमाई से चलने वाले सरकारी तंत्र में किस तरह कुछ अफसर और कर्मचारी घूसखोरी को अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझ बैठे हैं, ये हालिया मामला इसका जीता-जागता उदाहरण है।
Hazaribagh Doctor Bribe: रिश्वत लेते धरा गया सरकारी डॉक्टर
हजारीबाग जिले के चौपारण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सक डॉ. सतीश कुमार को एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की टीम ने मंगलवार को 4000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ दबोच लिया। यह गिरफ्तारी झारखंड में बीते एक हफ्ते के भीतर रिश्वतखोरी के मामलों में तीसरी बड़ी कार्रवाई है, जिसने पूरे स्वास्थ्य महकमे और प्रशासन में सनसनी फैला दी है।
Hazaribagh Doctor Bribe: ममता के पैसे पर भी डॉक्टर ने नहीं दिखाई ममता
चौपारण के दादपुर गांव के रहने वाले उज्जवल कुमार सिन्हा स्वास्थ्य विभाग की ममता योजना के तहत ‘ममता वाहन’ किराए पर चलाते हैं। यह वाहन गर्भवती महिलाओं एवं नवजात शिशुओं को अस्पताल लाने-ले जाने का काम करता है। उज्जवल के अनुसार, उनके वाहन का पिछले तीन-चार महीने का बिल स्वास्थ्य विभाग के पास बकाया पड़ा था। उनके जमा बिल की कुल राशि करीब 25 हजार रुपये थी, जिसका भुगतान कराने के एवज में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. सतीश कुमार ने उनसे चार हजार रुपये की घूस मांग की।
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जिसके बाद उज्जवल ने हजारीबाग ACB इकाई में इसकी लिखित शिकायत की। एंटी करप्शन ब्यूरो ने शिकायत की प्राथमिक जांच कराई, जिसमें मामला बिल्कुल सही पाया गया। इसके बाद ACB ने एक विशेष योजना बनाई। योजना के तहत मंगलवार को शिकायतकर्ता उज्जवल ने डॉक्टर सतीश कुमार को एक जगह पर चार हजार रुपये घूस के तौर पर सौंपे, और जैसे ही डॉ. सतीश ने पैसे अपने हाथ में लिए, ACB की टीम ने उन्हें मौके पर ही धर दबोचा।
Hazaribagh Doctor Bribe: रंगे हाथ पकड़े जाने पर डॉक्टर की हालत खराब
गिरफ्तार होते ही डॉ. सतीश कुमार के चेहरे की हवाइयां उड़ने लगी। ACB की टीम ने उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। इसके साथ ही उनके सरकारी आवास पर भी छापेमारी की गई, जहां से नगद राशि बरामद होने की सूचना मिल रही है।
यह मामला यह बताता है कि सरकार कि तमाम पहलों के बावजूद कैसे छोटे-छोटे बिलों के भुगतान के लिए भी जनता को अपने से ऊपर बैठे अधिकारियों को रिश्वत देनी पड़ रही है। एक तरफ सरकार ममता वाहन जैसी योजनाएं चलाकर ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने में अपना सहयोग दे रहे है, दूसरी ओर उसी व्यवस्था के कुछ लोग उन प्रयासों को पलीता लगाने में कोई कसर नहीं नहीं छोड़ रहे।
Hazaribagh Doctor Bribe: पहले भी सामने आ चुके हैं रिश्वतखोरी के मामले
राज्य में यह रिश्वतखोरी का इकलौता मामला नहीं है। बीते 26 जून को भी लोहरदगा और धनबाद जिले में भी ACB ने 2 सरकारी कर्मचारियों को घूस लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया था। लोहरदगा जिले में ग्रामीण विकास विभाग के विशेष प्रमंडल में तैनात खजांची को आंगनबाड़ी भवनों के जीर्णोद्धार कार्य के लिए आए एक व्यक्ति से चार हजार रुपये घूस लेते गिरफ्तार किया गया था। जबकि धनबाद में भूमि सुधार उपसमाहर्ता कार्यालय में तैनात कंप्यूटर ऑपरेटर को 15000 रुपये रिश्वत लेते पकड़ा था।
राज्य से जिस तरह रिश्वतखोरों के कारनामों के मामले उजागर हो रहे है उससे साफ जाहिर है कि जनता को अपना काम कराने के लिए जेब ढीली करनी पड़ती है। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने बता दिया है कि तमाम सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार कितनी गहराई तक जा चुका है। हालांकि ACB की ताबड़तोड़ कार्रवाई ने भ्रष्ट अफसरों और कर्मचारियों को साफ सन्देश दिया है कि आज नहीं तो कल वो जरूर हत्थे चढ़ेंगे। अब देखना यह होगा कि क्या इस तरह की कार्रवाई से बाकी भ्रष्ट अफसर ईमानदारी के रास्ते पर लौटेंगे या यूंही अवैध उगाही करते रहेंगे।
जनता को उम्मीद है कि एंटी करप्शन ब्यूरो की सख्त कार्रवाई जरूर सरकारी कर्मचारियों में डर बढ़ेगा जो कि अच्छी बात है। मेहनतकश गरीबों, किसानों तथा ठेकेदारों को अपना मामली काम करने में किसी तरह की कोई रिश्वत नहीं देनी पड़ेगी। साथ ही यह भी अपेक्षा है कि पकड़े गए आरोपी सिर्फ जेल की सलाखों तक सीमित न रहें, बल्कि उन पर संबंधित विभागीय कार्रवाई भी तेज़ी से हो ताकि भ्रष्टाचार पर कड़ा संदेश जाए।