Shibu Soren Health Updates: दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल की एक आईसीयू में, झारखंड की आत्मा, उसका इतिहास, उसकी लड़ाई, और उसका सबसे बड़ा आंदोलनकारी शिबू सोरेन ज़िंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं। झामुमो के संरक्षक, पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड आंदोलन के सबसे ताक़तवर प्रतीक शिबू सोरेन उर्फ़ ‘गुरूजी’ को ब्रेन स्ट्रोक और पैरालिसिस के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनके शरीर का एक हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया है। सांस लेने में तकलीफ है, किडनी इन्फेक्शन है, ब्रोंकाइटिस है — और उनके लिए दुआओं के सिवा फिलहाल कोई और इलाज बड़ा नहीं लग रहा।
Shibu Soren Health Updates
शिबू सोरेन का बीमार होना एक व्यक्ति का बीमार होना नहीं है यह उस आंदोलन का बीमार होना है जिसने झारखंड को दिल्ली की बंधी हुई मुट्ठी से आज़ाद कराया था। गुरूजी की हालत की खबर सामने आते ही पूरे झारखंड में जैसे एक गूंगा सन्नाटा फैल गया। वो गांव, जो कभी उनके भाषणों से गूंजते थे, वो शहर, जो उनके संघर्षों की वजह से बने, आज चुप हैं — और इस चुप्पी में भी एक चीख है — “गुरूजी को कुछ नहीं होना चाहिए!”
Shibu Soren Health Updates: डॉक्टर ने क्या कहा?
डॉक्टरों के मुताबिक उनकी स्थिति “स्थिर लेकिन गंभीर” है। उन्हें ICU में लगातार मॉनिटर किया जा रहा है। सांस लेने के लिए उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया है और न्यूरोलॉजिस्ट्स की एक स्पेशल टीम उनकी स्थिति पर हर घंटे नज़र बनाए हुए है। अभी अगला 48 घंटा बेहद अहम बताया जा रहा है।
Shibu Soren Health Updates: हेमंत दिल्ली पहुंचे
इस बीच, राजनीतिक हलकों में हलचल तेज है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन लगातार अस्पताल में डटे हैं। उनके छोटे भाई बसंत सोरेन और परिवार के अन्य सदस्य भी डॉक्टरों से पल-पल की जानकारी ले रहे हैं। देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी सर गंगा राम अस्पताल पहुंचीं और गुरूजी का हालचाल लिया। राष्ट्रपति का दौरा सिर्फ औपचारिकता नहीं था — यह उस सम्मान का प्रतीक था, जो शिबू सोरेन ने भारत की राजनीति में आदिवासी आवाज़ को देकर हासिल किया है।
Shibu Soren Health Updates: पूरे झारखंड की दिल्ली पर नजर
झारखंड में गांव-गांव पूजा-पाठ हो रहा है, आदिवासी समाज पारंपरिक तरीकों से गुरूजी के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहा है। झामुमो के कार्यकर्ता तो मानो हिल गए हैं जो पार्टी आज सत्ता में है, उसकी नींव गुरूजी के संघर्ष से बनी थी। और आज, जब वही गुरूजी जीवन की सबसे बड़ी लड़ाई में हैं, तो पार्टी के हर कार्यकर्ता की आंखें नम हैं और मुट्ठियां बंद।
शिबू सोरेन का जीवन सिर्फ राजनीति नहीं, एक आंदोलन की किताब है जिसमें जेल भी है, संसद भी। जिसमें माफियाओं से भिड़ंत भी है और दिल्ली दरबार को झुका देने वाला तेवर भी। उन्होंने कभी कुर्सी के लिए लड़ाई नहीं लड़ी. उनकी लड़ाई ज़मीन के लिए थी, ज़ुबान के लिए थी, और ज़िंदा पहचान के लिए थी।
आज वही गुरूजी अस्पताल की एक बेड पर लेटे हैं। मगर उनके लिए पूरा झारखंड खड़ा है। द अपडेट्स झारखंड के सबसे बड़े नेता के जल्द स्वस्थ्य होने की कामना करता है.
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