Jharkhand Safari: झारखंड के लोगों के लिए वो दिन दूर नहीं जब उन्हें जंगल सफारी करने के लिए किसी दूसरे राज्य में नहीं जाना होगा। जी हां सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए राज्य की पहली टाइगर सफारी की स्थापना का फैसला लिया है। इसके लिए बकायदा बिहार के राजगीर सफारी मॉडल को अपनाया जाएगा। पलामू का यह इलाका पहले माओवाद और नक्सल गतिविधियों से प्रभावित रहा है। ऐसे में सरकार चाहती है कि इस प्रोजेक्ट के जरिए यहां न सिर्फ पर्यटन को बढ़ावा मिले बल्कि लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार भी उपलब्ध हो
Jharkhand Safari: क्या है योजना
पलामू बाघ अभयारण्य (पीटीआर) इस योजना का केंद्र बनेगा। पीटीआर में इस समय करीब 5 बाघ मौजूद बताए जा रहे हैं। यह अभयारण्य 1,129 वर्ग किलोमीटर में फैला है, जिसमें 414 वर्ग किलोमीटर कोर एरिया और 715 वर्ग किलोमीटर बफर जोन भी शामिल है। बफर जोन में से 53 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर्यटन के लिए पहले से ही खुला हुआ है।
Jharkhand Safari: क्यों चुना गया राजगीर मॉडल?
झारखंड सरकार के इस प्रोजेक्ट के लिए राजगीर मॉडल इसलिए चुना गया क्योंकि वहां टाइगर सफारी के साथ-साथ कांच का पुल और अन्य आकर्षण भी शामिल किए गए हैं। जिससे राजगीर में न सिर्फ पर्यटन बढ़ा बल्कि यह इलाका आर्थिक रूप से विकास कर रहा है। झारखंड सरकार भी चाहती है कि पलामू में भी इसी तरह की तरक्की आए।
Jharkhand Safari: सफारी के लिए कहां बनेगी जमीन?
टाइगर सफारी के लिए 150 हेक्टेयर जमीन की जरूरत है। इसके लिए पीटीआर के पुटूगढ़ क्षेत्र में जमीन की पहचान भी के ली गई है। इस योजना को सबसे पहले राज्य वन्यजीव बोर्ड के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा, और फिर इसे केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA) के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। सरकार की यह पूरी परियोजना सभी राष्ट्रीय मानकों और पर्यावरण के नियमों का पालन करते हुए बनाई जाएगी।
Jharkhand Safari: 250 करोड़ की लागत, कई संभावनाए
इस सफारी पर तकरीबन ₹250 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। अधिकारी मानते हैं कि इससे इस इलाके में पर्यटन के जरिए होटल, गाइड, जीप सफारी, हस्तशिल्प और स्थानीय व्यंजनों को बढ़ावा मिलेगा। इससे सैकड़ों लोगों को रोजगार मिलेगा, जो पहले नक्सलवाद की वजह से बेरोजगारी और गरीबी झेलते थे।
साथ ही राज्य सरकार की योजना है कि पलामू किले के पुनरुद्धार और कमलदीह झील के सौंदर्यीकरण के जरिए इस क्षेत्र को एक समग्र पर्यटन स्थल बनाया जाए।
यह राज्य की पहली टाइगर सफारी होगी, जो पलामू बाघ अभयारण्य (PTR) में बनाई जाएगी।
राजगीर मॉडल पर आधारितबिहार के राजगीर सफारी की तर्ज पर इसे विकसित किया जाएगा, जहां पर्यटन में जबरदस्त वृद्धि हुई है।
150 हेक्टेयर में बनेगी सफारी, इसके लिए पलामू में पुटूगढ़ क्षेत्र में कम से कम 150 हेक्टेयर जमीन की पहचान की गई है।
नक्सल क्षेत्र में विकास की रोशनी
पलामू का पुटूगढ़ इलाका जहां यह सफारी बनेगी, जी की लंबे समय तक नक्सली गतिविधियों से प्रभावित रहा है। रोजगार के अवसर न के बराबर थे, जिससे कई लोग पलायन को मजबूर हुए। लेकिन अब सरकार मानती है कि इस तरह की परियोजनाएं यहां के युवाओं को स्थानीय रोजगार देंगी और आर्थिक हालत सुधारेंगी।
राजगीर मॉडल को अपनाकर झारखंड की यह पहल सिर्फ पर्यटन बढ़ाने की कोशिश नहीं है, बल्कि पलामू जैसे नक्सल प्रभावित इलाके में रोजगार और विकास की मुख्यधारा में लाने की भी रणनीति है। उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में यह सफारी झारखंड के पर्यटन मानचित्र पर एक नई पहचान बनाएगी और बाघों के साथ-साथ यहां के लोगों के जीवन में भी नई रोशनी लाएगी।