नाम पंचमी (सोर्स- सोशल मीडिया)
Nag Panchami 2025: सावन माह में कई धार्मिक पर्व और व्रत आते हैं, जो भगवान शिव को समर्पित होते हैं। इन्हीं में एक विशेष त्यौहार है नाग पंचमी, जो हर साल सावन शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व नागों (सांपों) की पूजा के लिए समर्पित होता है और इसका विशेष महत्व हिंदू धर्म में बताया गया है।
इस दिन भक्तगण विशेष रूप से नाग देवता की पूजा करते हैं और उन्हें दूध अर्पित करते हैं। भारत ही नहीं, नेपाल समेत कई देशों में यह पर्व पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है।
नाग पंचमी की अनोखी परंपरा
भारत के कई हिस्सों में नाग पंचमी के दिन घर के मुख्य द्वार पर नाग देवता की तस्वीर या आकृति बनाई जाती है। यह परंपरा केवल सांस्कृतिक नहीं, बल्कि धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से भी बेहद शुभ मानी जाती है।
लक्ष्मी जी का वास माने जाते हैं नाग देवता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नाग देवता को देवी लक्ष्मी का अनुयायी माना गया है। ऐसी मान्यता है कि अगर नाग पंचमी के दिन घर के दरवाज़े पर उनकी आकृति बनाई जाए और विधिपूर्वक पूजा की जाए, तो घर में लक्ष्मी का वास होता है, जिससे सुख, शांति और समृद्धि आती है।
कालसर्प दोष से राहत
ज्योतिष के अनुसार, नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा करने और उनकी आकृति बनाकर पूजन करने से कालसर्प दोष के प्रभाव को कम किया जा सकता है। साथ ही राहु-केतु के दुष्प्रभाव भी शांत होते हैं। इस उपाय से सर्प भय भी दूर होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है।
राहु-केतु के दुष्प्रभाव शांत होते हैं
नाग पंचमी पर नाग देवता का पूजन करने से राहु-केतु के नकारात्मक प्रभाव भी दूर होते हैं। साथ ही जीवन में बाधाएँ कम होती हैं और सुखद परिणाम प्राप्त होते हैं।
नाग पंचमी का यह पर्व केवल धार्मिक श्रद्धा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे छिपे ज्योतिषीय उपाय और आध्यात्मिक लाभ इसे और भी खास बनाते हैं।