भगवान गणेश (सोर्स- सोशल मीडिया)
Ganesh Chaturthi 2025: इस साल 10 दिवसीय गणेश उत्सव 27 अगस्त से शुरू होने जा रहा है। इस शुभ अवसर पर प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश की पूजा-अर्चना की जाएगी। गणेश जी को विघ्नहर्ता कहा जाता है और ऐसा माना जाता है कि उनकी पूजा से सभी बाधाएँ दूर होती हैं और जीवन में सुख-शांति आती है। भक्तजन बड़े ही उल्लास, संगीत, भक्ति और प्रेम के साथ गणपति बप्पा का अपने घरों में स्वागत करते हैं। हालांकि, हर परिवार के पास बप्पा को विराजमान करने के लिए समय और परिस्थितियाँ अलग होती हैं। ऐसे में लोग अपनी श्रद्धा और सुविधा के अनुसार डेढ़ दिन से लेकर 11 दिन तक गणेश जी को अपने घर में स्थापित करते हैं।
डेढ़ दिन (चतुर्थी से पंचमी तक)
गणेश चतुर्थी से पंचमी तक यानी डेढ़ दिन के लिए गणेश जी की स्थापना एक भावनात्मक और व्यावहारिक विकल्प माना जाता है। यह अवधि उन भक्तों के लिए आदर्श होती है जो सीमित समय में पूरे भाव से गणपति पूजन करना चाहते हैं। कई सेलिब्रिटी और आम लोग इस परंपरा को अपनाते हैं, जिसमें गणपति आगमन के अगले दिन ही उनका विसर्जन कर दिया जाता है। इसे ‘भावनात्मक विदाई’ कहा जाता है।
3 दिन
जो लोग व्यस्त दिनचर्या के कारण लंबा उत्सव नहीं मना सकते, वे तीन दिनों के लिए गणेश जी को घर में विराजमान करते हैं। इसमें भक्त पहले दिन स्थापना कर, दूसरे दिन विशेष पूजा करते हैं और तीसरे दिन विसर्जन करते हैं। यह छोटा लेकिन भावनात्मक रूप से समर्पित उत्सव का रूप है, जो आस्था के साथ संतुलन भी बनाए रखता है।
5 दिन
पांच दिनों की गणपति स्थापना को शुभ और संतुलित विकल्प माना जाता है। यह अवधि परिवारों को पूजा, प्रसाद, मेहमानों का स्वागत और धार्मिक अनुष्ठान करने के लिए पर्याप्त समय देती है। यह न तो बहुत छोटा होता है और न ही बहुत लंबा, जिससे व्यावसायिक जीवन के साथ धार्मिक उत्सव का आनंद भी लिया जा सकता है।
7 दिन
जो भक्त उत्सव को पूरे सप्ताह तक मनाना चाहते हैं, वे सात दिनों तक गणपति बप्पा को विराजमान करते हैं। इस दौरान घर में भक्ति-भाव, संगीत और उत्साह का माहौल बना रहता है। परिवार के सदस्य और आस-पड़ोस के लोग भी पूजा में भाग लेते हैं, जिससे सामूहिक भक्ति और जुड़ाव बढ़ता है।
11 दिन (गणेश चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक)
गणपति बप्पा को पूरे 11 दिनों तक घर या पंडाल में विराजमान करने की परंपरा सबसे व्यापक और पारंपरिक मानी जाती है। यह विशेष रूप से महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में प्रचलित है। अनंत चतुर्दशी के दिन भव्य शोभायात्रा के साथ गणपति जी का विसर्जन किया जाता है। यह भक्ति, भव्यता और सामाजिक एकता का प्रतीक होता है।