चेतेश्वर पुजारा (सोर्स- सोशल मीडिया)
Cheteshwar Pujara: भारतीय टेस्ट क्रिकेट की ‘दीवार’ कहे जाने वाले चेतेश्वर पुजारा ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी है। उन्होंने रविवार को एक भावुक पोस्ट के जरिए फैंस और टीम को धन्यवाद कहते हुए क्रिकेट को अलविदा कहा। लंबे समय से टीम इंडिया से बाहर चल रहे पुजारा ने भले ही अंतिम समय में टीम का हिस्सा न रहे हों, लेकिन उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। खासकर टेस्ट क्रिकेट में उनकी भूमिका भारतीय क्रिकेट इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेगी।
ऐतिहासिक जीत में रहा पुजारा का योगदान
चेतेश्वर पुजारा भारतीय टेस्ट टीम के लिए एक मजबूत स्तंभ रहे। उन्होंने अपनी तकनीक, धैर्य और जुझारूपन से भारत को कई कठिन परिस्थितियों से निकालकर जीत दिलाई। विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 2018 और 2020-21 की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी जीत में उनका प्रदर्शन अद्वितीय रहा।
2018 की ऐतिहासिक सीरीज़ में पुजारा ने 4 टेस्ट में 521 रन बनाए और ‘मैन ऑफ द सीरीज़’ भी बने। इस जीत में उनका योगदान निर्णायक था, जहां उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज़ों को थका कर मैदान पर राज किया।
पुजारा के लिए सबसे मुश्किल रहे ये 4 गेंदबाज़
संन्यास के बाद एक इंटरव्यू में पुजारा ने उन चार गेंदबाजों के नाम उजागर किए, जिन्होंने उनके करियर में उन्हें सबसे अधिक चुनौती दी। टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में पुजारा ने कहा, “मेरे करियर के दौरान डेल स्टेन, मोर्ने मोर्कल, जेम्स एंडरसन और पैट कमिंस ऐसे गेंदबाज़ थे जिनका सामना करना सबसे मुश्किल था।”
ये सभी गेंदबाज़ विश्व क्रिकेट के दिग्गज रहे हैं और पुजारा जैसे रक्षात्मक बल्लेबाज़ को भी इनसे जूझना पड़ा। हालांकि, पुजारा ने मिचेल स्टार्क, कैगिसो रबाडा जैसे कई तेज गेंदबाजों के खिलाफ भी शानदार पारियां खेली हैं।
103 टेस्ट मैचों का चमकदार करियर
चेतेश्वर पुजारा ने भारत के लिए 103 टेस्ट मैच खेले, जिसमें उन्होंने 7195 रन बनाए। उनका बल्लेबाज़ी औसत 43.60 रहा और उन्होंने 19 शतक और 35 अर्धशतक जड़े। टेस्ट क्रिकेट में उनका धैर्य और मानसिक दृढ़ता उन्हें बाकी बल्लेबाज़ों से अलग बनाता है।
वनडे क्रिकेट में पुजारा को ज्यादा मौके नहीं मिले। उन्होंने केवल 5 वनडे मैचों में 51 रन बनाए। लेकिन टेस्ट फॉर्मेट में उनकी पहचान ‘क्रिकेट की परंपरागत आत्मा’ की तरह रही है।
अचानक लिया संन्यास का फैसला
हाल के वर्षों में पुजारा टीम इंडिया से बाहर चल रहे थे, और घरेलू क्रिकेट या काउंटी क्रिकेट में खेल रहे थे। हालांकि, उनके अचानक लिए गए इस फैसले ने क्रिकेट प्रशंसकों को भावुक कर दिया है।
अब पुजारा को भविष्य में कोचिंग या कमेंट्री जैसे नए रोल में देखने की उम्मीद जताई जा रही है। लेकिन फैंस के लिए पुजारा हमेशा भारतीय टेस्ट क्रिकेट की दीवार के तौर पर याद किए जाएंगे।