कांवड़ यात्रा (सोर्स- सोशल मीडिया)
Kanwar Yatra 2025: सावन का पवित्र महीना शुरू होते ही व्रत, पूजन और कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व होता है। भक्तगण देश के अलग-अलग हिस्सों से गंगाजल लेने के लिए कांवड़ यात्रा पर निकलते हैं और भगवान शिव को जल अर्पित करते हैं। लेकिन इस यात्रा के दौरान कुछ नियमों का पालन करना बेहद ज़रूरी होता है। इन्हीं नियमों में से एक नियम है, कांवड़ यात्रा करते समय गूलर और अंजीर के पेड़ के नीचे से न गुजरना।
गूलर के पेड़ के नीचे क्यों नहीं गुजरते कांवड़िए?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गूलर का पेड़ पूजनीय होता है और इसका संबंध शुक्र ग्रह और धन के देवता कुबेर से माना गया है। यह विश्वास किया जाता है कि यदि कोई कांवड़िया इस पेड़ के नीचे से गुजरता है और उसके पत्ते या फल पैरों के नीचे आ जाते हैं, तो इससे भगवान शिव अप्रसन्न हो जाते हैं और यात्रा खंडित मानी जाती है।
इसलिए, सावधानीवश कांवड़ियों को सलाह दी जाती है कि वे गूलर के पेड़ के नीचे से न जाएं। यदि कोई गलती से ऐसा कर भी लेता है, तो यात्रा अधूरी मानी जाती है और उसे फिर से आरंभ करना पड़ता है।
अंजीर के पेड़ से जुड़ी मान्यता और वैज्ञानिक कारण
गूलर की तरह अंजीर के पेड़ के नीचे से गुजरने की भी मनाही होती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, अंजीर के फलों में असंख्य सूक्ष्म जीव-जंतु होते हैं। यदि किसी कांवड़िये का पैर इन फलों पर पड़ जाए, तो वह अनजाने में इन जीवों की हत्या का पाप कर बैठता है। इसके चलते उसकी कांवड़ यात्रा भी शुद्ध नहीं मानी जाती और उसे शिव को जल अर्पित करने का अधिकार नहीं रहता।
वहीं वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो अंजीर के पेड़ पर कीड़े-मकोड़े और सूक्ष्म जीव-जंतु बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। इनके संपर्क में आने से त्वचा पर एलर्जी या संक्रमण हो सकता है। इसी कारण इन पेड़ों के नीचे से गुजरने की मनाही होती है।
यात्रा बाधित हो जाए तो क्या करें?
अगर किसी कारणवश कांवड़ यात्रा के दौरान यह नियम टूट जाए या यात्रा खंडित हो जाए, तो कांवड़िये को किसी सुरक्षित स्थान पर रुककर भगवान शिव से क्षमा मांगनी चाहिए। साथ ही 108 बार “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करना चाहिए और वहां जल का विसर्जन कर अपनी यात्रा फिर से शुरू करनी चाहिए।
इस तरह के नियम न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि इनके पीछे वैज्ञानिक कारण भी छिपे होते हैं, जो हमारी सुरक्षा और शुद्धता से जुड़े होते हैं।