पढ़ाई में नदी भी नहीं बनी रोडा
Inspiring Story: झारखंड की खूंटी में एक पुल टूट गया, मगर छात्रा का हौसला नहीं टूटा। महज पंद्रह की इस छात्रा को रोज अपनी किताबें सिर पर रखकर नदी तैरनी पड़ती है ताकि वह स्कूल जा सके। जहां पहले 5 मिनट में लगते थे, अब चालीस मिनट लगते हैं। टूटी सड़कें, बहता पानी और सरकारी वादों के बावजूद, सुनीता और उसके साथ की लड़कियां साबित कर रही हैं— सपनों तक पहुंचने के लिए हौसला सबसे बड़ा पुल होता है।
झारखंड के खूंटी जिले की 15 वर्षीय प्रिय (बदला हुआ नाम) अगले साल बोर्ड परीक्षा देने वाली है। लेकिन आज उसे पढ़ाई के लिए ऐसा जोखिम उठाना पड़ रहा है जो किसी को भी हैरान कर दे। पिछले महीने उसके गांव को स्कूल से जोड़ने वाला इकलौता पुल अचानक गिर गया। अब सुनीता रोजाना अपनी जान जोखिम में डालकर बनई नदी तैरकर स्कूल जाती है।
Inspiring Story: कैसे टूटा पुल
दरअसल, 2007 में लगभग ₹1.30 करोड़ की लागत से इस पुल को बनाया गया था, जो रांची-खूंटी-सिमडेगा रोड को पेलोल गांव से जोड़ता था।19 जून को हुई भारी बारिश से पुल के एप्रोच रोड को सहारा देने वाला एक खंभा झुक गया, जिससे पुल का एक हिस्सा गिर पड़ा। खूंटी की अधिकारी ने बताया, “पुल के पास एक डायवर्सन बनाने का काम शुरू कर दिया गया है, लेकिन लगातार बारिश के चलते इसमें रुकावट आ रही है। तब तक ट्रैफिक को वैकल्पिक रास्ते से डायवर्ट किया गया है।”
Inspiring Story: बांस की सीढ़ी भी फेल
शुरुआत में गांव वालों ने टूटी जगह पर बांस की सीढ़ी डालकर आवागमन चालू रखने की कोशिश की थी। प्रिया बताती है, “हम लोग पहले उस सीढ़ी से पुल पार करते थे, लेकिन प्रशासन ने इसे खतरनाक बताते हुए बंद करवा दिया।”अब सुनीता के पास नदी तैरने को तैरकर पार करने के अलावा कोई चारा नहीं था। वह कहती है, “मैं नदी तैरते हुए स्कूल जाती हूं। स्कूल बैग को सिर के ऊपर रखती रखकर ताकि किताबें भीग न जाएं। लेकिन मेरे कपड़े पूरी तरह भीग जाते हैं, इसलिए घर से एक जोड़ी कपड़े एक्स्ट्रा लेकर जाती हूं।”
Inspiring Story: सिर्फ सुनीता ही नहीं, कई छात्र परेशान
आपको बता दें कि वो अकेली ऐसी बच्ची नहीं है। उसके साथ गांव की कई और लड़कियां और लड़के भी इसी तरह जोखिम उठाकर स्कूल जा रहे हैं। उसकी सहेली सविता (बदला हुआ नाम) कहती है, “अक्सर हम भीगे हुए कपड़ों में घर लौटते हैं। फिर अगले दिन स्कूल नहीं जा पाते।”इस पुल के टूटने से पेलोल हाई स्कूल और मिशनरी स्कूल के सैकड़ों छात्रों, साथ ही 12 गांवों के निवासियों की जिंदगी प्रभावित हो गई है।
Inspiring Story: स्कूल पहुँचने में अब लगते हैं 40 मिनट
जो रास्ता पहले मात्र 5 मिनट में तय हो जाता था, अब छात्रों को 12 किमी लंबा चक्कर काटकर स्कूल जाना पड़ता है। इसमें अब 40 मिनट का समय लगता है, साथ ही रोजाना का खर्च भी बढ़ गया है।
Inspiring Story: सिर्फ छात्र ही नहीं, भारी वाहन भी प्रभावित
रांची से ओडिशा की ओर सिमडेगा होकर जाने वाले भारी वाहन और बसों की आवाजाही भी आंशिक रूप से प्रभावित हुई है। हालांकि प्रशासन ने फिलहाल इन्हें दूसरे रास्तों से डायवर्ट किया है।
Inspiring story: मुख्यमंत्री ने दिए जांच के आदेश
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस पुल के गिरने की जांच के आदेश दे दिए हैं। एसडीओ ने बताया कि विभागीय जांच कमेटी गठित कर दी गई है, जो इस पूरे मामले की तह तक जाएगी।
Inspiring Story: सपने नहीं टूटने देंगे
खराब हालातों के बावजूद नदी पार कर जाने वाली छात्रा हार मानने को तैयार नहीं। एक छात्रा कहती है, “मेरे बोर्ड की तैयारी है, चाहे जितनी मुश्किल हो, मैं स्कूल जरूर जाऊंगी।” एक तरफ कुछ बच्चे पढ़ाई से बचने के लिए अजीब अजीब बहाने बनाते हैं वहीं ये बच्चियां नदी तैरकर भी अपने सपनों को बहने नहीं दे रहीं। यह कहानी सिर्फ सरकारी लापरवाही की नहीं, बल्कि हौसले की भी मिसाल है।