जामताड़ा बना साइबर फ्रॉड का गढ़
Cyber Fraud : जामताड़ा…झारखंड का ऐसा जिला जो साइबर ठगी की वजह से पूरे देश भर में चर्चा में रहता है, एक बार फिर से सुर्खियां बटोर रहा है। इस बार दिल्ली पुलिस की एक टीम ने जामताड़ा जिले में छापा मारकर 10.80 लाख रुपये की साइबर धोखाधड़ी करने वाले 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की इस कार्रवाई में सबसे दिलचस्प बात यह रही कि पुलिस ने आरोपियों तक पहुँचने के लिए खुद को स्थानीय लोगों की तरह दिखाने के लिए पारंपरिक आदिवासी पोशाक पहनी थी, ताकि वो ठगों की नजरों से बच सके।
Cyber Fraud: साइबर क्राइम का गढ़ बन चुका जामताड़ा
दिल्ली पुलिस के अधिकारी ने बताया कि जामताड़ा पिछले कई वर्षों से भारत में साइबर अपराध का गढ़ बन चुका है। देशभर में अगर कहीं भी लोगों के साथ धोखाधड़ी के मामले आते होते हैं या क्रेडिट कार्ड से फर्जी लेन-देन होते हैं, तो अक्सर उसके लिंक जामताड़ा में जरूर ढूंढे जाते हैं।
Cyber Fraud: कैसे खुला इस ठगी का मामला?
दरअसल दिल्ली के पालम इलाके में रहने वाले युवक से हुई। युवक ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 5 अप्रैल को उनके पास एक अनजान नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को मुंबई के एक सरकारी बैंक की क्रेडिट कार्ड शाखा का अधिकारी बताते हुए कहा कि आपके कार्ड से 588.82 रुपये का भुगतान हो गया है।
जब बर्थवाल ने हैरानी जताई, तो उस व्यक्ति ने उन्हें डराया कि जल्द से जल्द उनके क्रेडिट कार्ड को एक्टिव या ब्लॉक करना जरूरी है, वरना उनका और पैसा कट सकता है। उसने युवक के फोन पर एक लिंक भेजा और कहा कि इस लिंक पर क्लिक करें, यह हमारे बैंक की ऑफिशियल साइट है।
Cyber Fraud: कैसे फंस गया शिकार?
असल वह लिंक एक फर्जी वेबसाइट थी, जो देखने में बैंक की असली वेबसाइट जैसी ही लग रही थी। बिना सोचे समझे युवक ने उस लिंक को खोला और वहाँ अपने क्रेडिट कार्ड की पूरी डिटेल डाल दी।
अगले ही दिन फिर उसी नंबर से एक कॉल आया और उनसे और भी ज्यादा जानकारी मांगी गई। युवक ने वो भी दे दी। कुछ दिनों के अंदर ही उनके क्रेडिट कार्ड और बैंक अकाउंट से कुल 10.80 लाख रुपये निकल लिए गए। तब जाकर उन्हें समझ आया कि असल में वो साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं।
कैसे पहुंची पुलिस जामताड़ा?
युवक की शिकायत पर दिल्ली साइबर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया। जांच शुरू हुई तो तकनीकी निगरानी और कॉल रिकॉर्ड्स की अच्छे से पड़ताल की गई, पुलिस की इस जांच से यह साफ हो गया कि ठगी के तार जामताड़ा जिले के करमाटार से जुड़े हैं।
जिसके बाद पुलिस हरकत में आई, फिर पुलिस ने दो दिन तक इलाके में रहकर संदिग्धों पर नजर रखी। पुलिस ने इस दौरान स्थानीय लोगों की तरह दिखने के लिए पारंपरिक आदिवासी कपड़े पहने, ताकि कोई उन पर शक न करे। जैसे ही पुलिस को सही मौका मिला, टीम ने दबिश देकर तीनों को गिरफ्तार कर लिया।
कौन हैं गिरफ्तार आरोपी?
पकड़े गए आरोपियों के नाम मुजफ्फर जिलानी (27), आफताब अंसारी (27) और मोहम्मद इकबाल रजा (24) हैं। तीनों जामताड़ा के करमाटार के रहने वाले हैं। इनके पास से पुलिस ने पांच मोबाइल फोन, छह सिम कार्ड और एक डेबिट कार्ड बरामद किया है, जो इस धोखाधड़ी में इस्तेमाल किए जा रहे थे।
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आगे की कार्रवाई
पुलिस ने तीनों को ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली लाकर पूछताछ शुरू करनी शुरू कर दी है। अधिकारियों का मानना है कि इनकी गिरफ्तारी से जामताड़ा के बड़े साइबर नेटवर्क का भी भंडाफोड़ होगा।
ऑनलाइन बैंकिंग के जमाने में साइबर ठग किसी को भी अपना अपना निशाना बनाकर लाखों करोड़ों की चपत लगा देते है इसलिए जरूरी है कि किसी भी अपनी निजी जानकारी किसी भी हाल साझा मत कीजिए। सरकार भी लोगों को साइबर ठगी का शिकार होने से बचने के लिए जागरूक करती रहती है।
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