राज ठाकरे, फोटो - सोशल मीडिया
Hindi Language Controversy in Maharashtra: महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने राज्य में शिक्षा संस्थानों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर उन्होंने सरकार के “छिपे एजेंडे” का समर्थन किया, तो यह महाराष्ट्र के साथ विश्वासघात माना जाएगा।
राज ठाकरे ने सभी स्कूलों के प्राचार्यों को एक पत्र लिखते हुए महाराष्ट्र की फडणवीस सरकार पर हिंदी भाषा थोपने का आरोप लगाया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “अगर आपने सरकार के इशारे पर हिंदी या किसी तीसरी भाषा को लागू करने की कोशिश की, तो हम इसे महाराष्ट्र की अस्मिता के साथ गद्दारी मानेंगे।”
उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर उन्होंने राज्य सरकार को भी पत्र भेजा है, जिसमें यह मांग की गई है कि सरकार स्पष्ट रूप से यह लिखित आश्वासन दे कि हिंदी या कोई तीसरी भाषा अनिवार्य नहीं बनाई जाएगी। ठाकरे ने चेतावनी दी कि “सरकार शायद ऐसा पत्र जारी करे या नहीं, लेकिन अगर आप सरकार के छिपे एजेंडे को आगे बढ़ाते हैं, तो इसका जवाब हम जरूर देंगे।”
क्या है विवाद की जड़?
अप्रैल महीने में शिक्षा विभाग ने कक्षा 1 से ही तीन भाषाएं, मराठी, अंग्रेज़ी और हिंदी को अनिवार्य करने का निर्णय लिया था। यह फैसला महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना को रास नहीं आया और उसने इसका खुलकर विरोध किया।
राज ठाकरे का कहना है कि हिंदी महाराष्ट्र की भाषा नहीं है। यह केवल कुछ उत्तरी राज्यों की भाषा है, जिसे उन क्षेत्रों में ही सीमित रहना चाहिए।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हिंदी के माध्यम से उत्तर भारत के लोग “एक सभ्य महाराष्ट्र को कब्ज़े में लेना चाहते हैं” और भाषा थोपना इस कब्जे का सबसे आसान रास्ता है।
“अगर तीसरी भाषा नहीं पढ़ानी है, तो किताबें क्यों छप रही हैं?”
राज ठाकरे ने पत्र में सवाल उठाया कि अगर सरकार दावा कर रही है कि अब केवल दो भाषाएं ही पढ़ाई जाएंगी, तो फिर तीसरी भाषा की किताबें क्यों छप रही हैं? उन्होंने इसे सरकार की चुपचाप लागू करने की रणनीति करार दिया। उन्होंने कहा, “सरकार कागज़ों के साथ खेलना जानती है, लेकिन हम हर पन्ने पर नजर रख रहे हैं।”
स्कूलों को चेतावनी
उन्होंने सभी स्कूलों से कहा कि वे इस राजनीतिक खेल का हिस्सा न बनें। इसके साथ ही उन्होंने कहा, “आपसे आग्रह है कि किसी दबाव में न आएं। अगर सरकार दबाव बनाती है तो महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना आपके साथ खड़ी है। हम अपने बच्चों पर कोई भाषा थोपने नहीं देंगे।”
राज ठाकरे के इस तीखे पत्र के बाद राज्य की शिक्षा नीति को लेकर बहस तेज़ हो गई है। यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार और स्कूल इस चेतावनी पर क्या रुख अपनाते हैं।