संकष्टी चतुर्थी (सोर्स- सोशल मीडिया)
Sankashti Chaturthi: भाद्रपद मास 10 अगस्त से शुरू हो गया है। धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से हिंदू पंचांग का यह छठा महीना सनातन धर्म में विशेष महत्व रखता है। इस माह में कई व्रत और त्योहार मनाए जाते हैं, जिनमें हेरम्बा या बहुला संकष्टी चतुर्थी प्रमुख है। इस वर्ष यह व्रत 12 अगस्त को मनाया जाएगा। इसे विघ्नहर्ता गणपति बप्पा की विशेष आराधना का दिन माना जाता है, जिसमें भक्त व्रत रखकर गणेश जी से सुख-समृद्धि और बाधाओं से मुक्ति की कामना करते हैं।
हेरम्बा संकष्टी चतुर्थी 2025 की तिथि और समय
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 12 अगस्त को सुबह 8:41 बजे शुरू होकर 13 अगस्त को सुबह 6:36 बजे तक रहेगी। चूंकि चतुर्थी तिथि का चंद्रोदय 12 अगस्त, मंगलवार को होगा, इसलिए व्रत इसी दिन रखा जाएगा। इस दिन सुकर्मा और सर्वार्थ सिद्धि योग जैसे शुभ योग भी बनेंगे, जो पूजा के महत्व को और बढ़ाते हैं।
संकष्टी चतुर्थी का शुभ मुहूर्त और चंद्रोदय समय
हेरम्बा या बहुला संकष्टी चतुर्थी पर पूजा का विशेष मुहूर्त 12 अगस्त को रात 8:00 बजे से 8:45 बजे तक रहेगा। चंद्रमा का उदय रात 8:59 बजे होगा। मान्यता है कि इस दिन चंद्रोदय के समय चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का समापन करने से पुण्य और बढ़ जाता है।
संकष्टी चतुर्थी की पूजा विधि
इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र पहनें। घर के मंदिर की सफाई करें और गंगाजल से पवित्र करें। व्रत का संकल्प लेने के बाद एक चौकी पर भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। फिर उन्हें दूर्वा, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप और मोदक अर्पित करें। गणपति के मंत्रों और नामों का जाप करें और घी का दीपक जलाकर आरती करें। रात्रि में चंद्रोदय के समय चंद्रमा को जल अर्पित करें और व्रत खोलें।
बहुला संकष्टी चतुर्थी का धार्मिक महत्व
बहुला संकष्टी चतुर्थी को गणेश जी की विशेष कृपा प्राप्त करने का दिन माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन की पूजा से घर से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और शांति बनी रहती है। गणेश जी सभी विघ्नों को हर लेते हैं और भक्त की मनोकामनाएँ पूरी करते हैं। चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन अत्यंत शुभ होता है और व्रत का समापन इसी के साथ किया जाता है।
सालभर में संकष्टी चतुर्थी का विशेष स्थान
हिंदू पंचांग के अनुसार, वर्ष भर में संकष्टी चतुर्थी के 13 व्रत आते हैं, जिनमें से हर एक की अपनी कथा और महत्व है। भाद्रपद माह में आने वाली हेरम्बा संकष्टी को विशेष रूप से कल्याणकारी माना जाता है। यह व्रत न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम भी है।