वरलक्ष्मी व्रत (सोर्स- सोशल मीडिया)
Varalakshmi Vrat 2025: सावन का पवित्र महीना भगवान शिव को समर्पित है और इस दौरान कई धार्मिक व्रत-त्योहार मनाए जाते हैं। इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण पर्व है वरलक्ष्मी व्रत, जो इस बार 8 अगस्त 2025, शुक्रवार को मनाया जाएगा। यह व्रत विशेष रूप से महिलाओं के लिए सौभाग्य, वैवाहिक सुख और परिवार की उन्नति के लिए रखा जाता है। खास बात यह है कि इस दिन इंद्र योग और सुकर्मा योग जैसे शुभ संयोग भी बन रहे हैं, जिससे इस व्रत का महत्व और अधिक बढ़ जाता है।
वरलक्ष्मी व्रत का धार्मिक महत्व
वरलक्ष्मी व्रत मुख्य रूप से देवी लक्ष्मी को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक व्रत और पूजा करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों को धन, संतान और सौभाग्य का वरदान देती हैं। यह पर्व दक्षिण भारत में विशेष रूप से लोकप्रिय है, लेकिन अब यह उत्तर भारत में भी श्रद्धा के साथ मनाया जाने लगा है।
पूजा विधि: कैसे करें वरलक्ष्मी व्रत की पूजा
इस दिन महिलाएं सुबह ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करती हैं और घर की सफाई करके पूजा कक्ष को गंगाजल से शुद्ध करती हैं। एक वेदी पर माँ लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र स्थापित किया जाता है और उनका विधिवत अभिषेक, सोलह श्रृंगार, और लाल फूलों की माला अर्पित की जाती है।
इसके बाद अखंडित चावल से भरा हुआ कलश स्थापित किया जाता है और भोग के रूप में फल, मिठाई और खीर अर्पित की जाती है। पूजा के दौरान देसी घी का दीपक जलाकर देवी लक्ष्मी के वैदिक मंत्रों, लक्ष्मी स्तोत्र, और आरती का पाठ किया जाता है।
व्रत में रखें ये सावधानियां
इस दिन तामसिक भोजन से पूरी तरह बचना चाहिए। व्रती महिलाएं सात्विक भोजन या फलाहार ग्रहण कर सकती हैं। पूजा के बाद सात कन्याओं को आमंत्रित कर चावल की खीर खिलाना, हल्दी-कुमकुम और उपहार देना भी शुभ माना जाता है।
वरलक्ष्मी व्रत से पूरी होती हैं मनोकामनाएं
मान्यता है कि जो महिलाएं पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से वरलक्ष्मी व्रत रखती हैं, उनके जीवन में सौभाग्य, सुख और समृद्धि का वास होता है। इस दिन घर में श्रीयंत्र स्थापित कर तथा शाम को “ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं नमः” मंत्र का जाप करने से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।