मंगला गौरी व्रत (सोर्स- सोशल मीडिया)
Mangala Gauri Vrat: सावन माह शिव भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है, और इस पवित्र माह में मंगला गौरी व्रत का भी खास स्थान होता है। इस वर्ष 29 जुलाई को सावन का तीसरा मंगला गौरी व्रत पड़ रहा है, जो कि नाग पंचमी के पावन पर्व के साथ मनाया जा रहा है। दो शुभ पर्वों का एक साथ आना इसे अत्यंत फलदायी और दुर्लभ योग बनाता है।
मंगला गौरी व्रत का महत्व
हिंदू मान्यताओं के अनुसार, मंगला गौरी व्रत मुख्यतः विवाहित महिलाएं अपने पति की दीर्घायु, वैवाहिक सुख और अखंड सौभाग्य के लिए करती हैं। वहीं, अविवाहित कन्याएं इस व्रत को अच्छे वर की प्राप्ति और शीघ्र विवाह की कामना से करती हैं। यह व्रत श्रावण मास के प्रत्येक मंगलवार को रखा जाता है, और इसमें माँ पार्वती के मंगलमयी रूप की पूजा होती है।
व्रत की तिथि और शुभ मुहूर्त
सावन का तीसरा मंगला गौरी व्रत इस बार 29 जुलाई को रखा जा रहा है। इस दिन कृष्ण पक्ष की द्वादशी और त्रयोदशी तिथियां हैं। पूजा के लिए दिनभर कई शुभ मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे:
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 3:59 से 4:41 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:38 से दोपहर 12:31 बजे तक
अमृत काल: सुबह 11:42 से दोपहर 1:25 बजे तक
निशिता मुहूर्त: रात 11:43 से 12:26 बजे (30 जुलाई को)
मंगला गौरी व्रत की पूजा विधि
प्रातः काल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
लकड़ी के पवित्र आसन पर लाल कपड़ा बिछाकर माँ गौरी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
व्रत का संकल्प लेकर आटे का दीपक जलाएं।
माँ गौरी को फल, फूल, धूप, दीप, नैवेद्य आदि अर्पित करें।
मां मंगला गौरी की कथा का पाठ करें और अंत में आरती करके सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
नाग पंचमी के साथ बना शुभ योग
29 जुलाई को मंगला गौरी व्रत के साथ नाग पंचमी भी मनाई जा रही है। ऐसे में भक्तों के लिए यह दिन और भी शुभ बन गया है। इस दिन भगवान शिव, माता गौरी और नाग देवता तीनों की पूजा करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है।
फल और मान्यता
मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धा और विधिपूर्वक करने से मंगल दोष, विवाह में देरी और वैवाहिक जीवन की परेशानियां दूर होती हैं। यह व्रत स्त्रियों को सौभाग्यवती बनाए रखता है और कन्याओं को उत्तम वर की प्राप्ति कराता है।