25 जून को स्पेसX के फाल्कन-9 रॉकेट से भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने जब अंतरिक्ष के लिए उड़ान भरी, उस पल हर भारतीय की सांसे थमी हुई थी, जैसे ही काउंटडाउन खत्म हुआ वैसे ही Axiom-4 मिशन की सफल लॉन्चिंग के साथ जाकर जान में जान आई, भारत के लाल कैप्टन शुभांशु वो 1984 के बाद भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री बने और पहले भारतीय हैं जो इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) तक पहुंचे हैं।
लखनऊ से शुरू हुआ अंतरिक्ष सफर
लखनऊ के सिटी मॉन्टेसरी स्कूल से पढ़ाई कर चुके शुभांशु का सपना बचपन में एक एयर शो देखकर शुरू हुआ था. इसके बाद में NDA में प्रवेश लिया और 2006 में इंडियन एयरफोर्स में शामिल हुए. उनके पास मिग-29, सुखोई-30 जैसे जैसे फाइटर्स जेट्स को 2000 घंटे से ज्यादा उड़ाने का अनुभव है.

घर के खाने के साथ पहुंचे अंतरिक्ष
शुभांशु अपने साथ अंतरिक्ष में भी मूंग दाल हलवा और गाजर का हलवा साथ ले गए हैं. जो कि भारत के हर घर की शान है. उन्होंने कहा कि वे अपने साथियों को भी भारतीय मिठास का स्वाद चखाना चाहते हैं
गगनयान मिशन के भी सदस्य
शुभांशु साल 2019 में चुने गए गगनयान मिशन के चार भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों में से भी एक हैं. उन्होंने रूस और इसरो के ट्रेनिंग सेंटर में कड़ी ट्रेनिंग ली है, जो अंतरिक्ष में उनके काम आएगी, जहां वो कई प्रयोगों में हिस्सा लेंगे.
‘यूं ही चला चल…’ बना प्रेरणा गीत
मिशन लॉन्चिंग से पहले शुभांशु ने फिल्म स्वदेश का गीत ‘यूं ही चला चल…’ सुना, जो जीवन के सफर और देशप्रेम को दर्शाता है. अपने मिशन के सफल लॉन्च के 10 मिनट बाद उन्होंने कहा—
“41 साल बाद हम फिर अंतरिक्ष में हैं, और मेरे कंधे पर तिरंगा है… मैं अकेला नहीं, आप सब मेरे साथ हैं.”
स्कूल ने मनाया ‘व्योमोत्सव’
लखनऊ के CMS स्कूल में हुई पब्लिक वॉच पार्टी, ऑडिटोरियम को ‘मिनी स्पेस सेंटर’ में तब्दील हो गया. स्कूल की संस्थापक भारती गांधी ने कहा, “शुभांशु का सफर हर बच्चे के लिए उम्मीद की किरण है.”
पिता ने बताया कैसे हुआ NDA में प्रवेश
पिता शंभू शुक्ला ने बताया कि एक दोस्त के कहने पर शुभांशु ने NDA का फॉर्म भरा और फिर वही उनके अंतरिक्ष सफर की शुरुआत बनी. आज उनके नाम से लखनऊ के हर चौराहे पर पोस्टर लगे हैं. शुभांशु की इस अंतरिक्ष यात्रा पर हर भारतीय को गर्व है